सड़क हादसों में कमी के लिए निर्माण की गुणवत्ता जांचना जरूरी: Road Safety Expert
सड़क सुरक्षा पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सड़क हादसों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला है। उनका मानना है कि दुर्घटनाओं की गहराई से जांच होनी चाहिए, जिसमें सड़क निर्माण की गुणवत्ता और संबंधित विभागों की भूमिका को भी शामिल किया जाए। वर्तमान में, अधिकांश जांचों में केवल ड्राइवरों को ही दोषी ठहराया जाता है, जबकि सड़क निर्माण की खामियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन के अध्यक्ष डॉ. रोहित बालुजा ने बताया कि प्रदेश में पिछले वर्ष 46 हजार से अधिक दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 24 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों में जांच का दायरा केवल ड्राइवरों तक सीमित रहा, जिससे सड़क निर्माण में लापरवाही करने वाली संस्थाएं बच निकलीं। यह हमारी सबसे बड़ी चूक है, जिसके कारण हादसों का मूल कारण पता नहीं चल पाता और उनमें कमी नहीं आती।
डॉ. बालुजा ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि हिमाचल के चंबा में एक बस खाई में गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे ओवरस्पीडिंग और ड्राइवर की गलती माना। लेकिन गहन जांच में पाया गया कि दुर्घटना का मुख्य कारण सड़क का संकरा होना और घुमावदार मोड़ पर सामने से अचानक आई गाड़ी का न दिखना था। सड़क निर्माण अथॉरिटी की लापरवाही के कारण वहां कोई साइनेज (संकेत) भी नहीं था। इस मामले में घायल एक लड़की ने भी बताया था कि ड्राइवर आराम से चला रहा था।
कार्यशाला में यह भी सामने आया कि कई बार ड्राइवरों को लगातार 14 से 18 घंटे तक गाड़ी चलानी पड़ती है, जिससे वे थकावट का शिकार हो जाते हैं। बसों में उचित आराम की व्यवस्था न होना, टूटी विंडस्क्रीन और खराब टायर जैसी समस्याएं भी हादसों को न्योता देती हैं। ऐसे में, केवल ड्राइवर को दोषी ठहराना उचित नहीं है। सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें सड़क निर्माण से लेकर वाहन की स्थिति और ड्राइवरों की कार्य परिस्थितियों तक सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाए।
