क्या आपके साथ भी हो रही है ‘Quiet Firing’? जानें कॉर्पोरेट जगत की यह नई चुनौती
कॉर्पोरेट जगत में ‘Quiet Firing’ एक ऐसी रणनीति है जो आजकल खूब चर्चा में है, हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। यह उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है जो अपने करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ किसी कर्मचारी को सीधे तौर पर नौकरी से नहीं निकाला जाता, बल्कि धीरे-धीरे उसे बाहर धकेलने का माहौल बनाया जाता है। इसका सीधा असर कर्मचारी के मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर विकास पर पड़ता है।
‘Quiet Firing’ का मतलब है कि मैनेजर या कंपनी जानबूझकर कर्मचारी के लिए काम का माहौल इतना असहज या नीरस बना देते हैं कि वह खुद ही नौकरी छोड़ने का फैसला कर ले। इसमें अक्सर जिम्मेदारियों को कम करना, महत्वपूर्ण बैठकों से बाहर रखना, ईमेल का जवाब न देना या बिना किसी स्पष्टीकरण के प्रोजेक्ट्स से हटा देना शामिल हो सकता है। यह ‘Quiet Quitting’ के ठीक विपरीत है, जहाँ कर्मचारी केवल उतना ही काम करता है जितना आवश्यक है।
यह प्रबंधन की एक ऐसी चाल है जो कर्मचारी को असुरक्षित महसूस कराती है और उसे अपनी क्षमताओं पर संदेह करने पर मजबूर कर देती है। ऐसे में कर्मचारी अक्सर तनाव और चिंता का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता और प्रदर्शन पर भी बुरा असर पड़ता है। इस प्रकार की रणनीति से कर्मचारियों के बीच अविश्वास बढ़ता है और कार्यस्थल का माहौल खराब होता है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव कंपनी की संस्कृति पर भी पड़ता है।
