रक्षा उत्पादन में भारत की ऐतिहासिक छलांग, रक्षा निर्यात में 12% की वृद्धि
भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में 1.54 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के साथ रक्षा क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया है। यह देश का अब तक का सबसे उच्च रक्षा उत्पादन है और स्वदेशी रक्षा निर्माण में एक महत्वपूर्ण छलांग का प्रतीक है। यह उपलब्धि सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की सफलता को रेखांकित करती है, जिसका उद्देश्य देश को रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रियाओं (डीएपी 2020) और रक्षा खरीद नियमावली (डीपीएम 2025) में सुधारों ने खरीद प्रक्रिया में गति, पारदर्शिता और नवाचार को बढ़ावा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, अब रक्षा उपकरणों का लगभग 65 प्रतिशत देश में ही उत्पादित हो रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना से 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है, जिसने स्थानीय विनिर्माण को और बढ़ावा दिया है। स्टार्टअप्स, निजी कंपनियों और 16,000 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की सक्रिय भागीदारी ने रक्षा उत्पादन को नई गति दी है।
निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल प्रणालियों को अपनाने और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) जैसी पहलों ने देश के रक्षा निर्यात को पंख लगाए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। भारत अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और उन्नत युद्ध प्रणालियों जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित प्रणालियों (IDDM) के उत्पादन पर भी जोर दे रहा है। यह प्रगति न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति को भी मजबूत करती है।
