भारत की पहली महिला मौसम वैज्ञानिक Anna Mani: CV Raman के साथ काम करने पर भी नहीं मिली PhD
अन्ना मणि, भारत की पहली महिला मौसम वैज्ञानिक, एक ऐसी शख्सियत थीं जिन्होंने देश के मौसम विज्ञान की नींव रखी। 1918 में त्रावणकोर (केरल) में जन्मी अन्ना मणि ने उस दौर में विज्ञान को चुना जब महिलाओं के लिए यह क्षेत्र लगभग वर्जित माना जाता था।
उनकी प्रतिभा ने उन्हें बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) तक पहुंचाया, जहां उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन की प्रयोगशाला में काम किया। यहां उन्होंने स्पेक्ट्रोस्कोपी और क्रिस्टलोग्राफी पर महत्वपूर्ण प्रायोगिक शोध किया। हालांकि, उनके शोध को शैक्षणिक मान्यता नहीं मिली।
उस समय IISc मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध था, और अन्ना मणि के पास औपचारिक मास्टर डिग्री नहीं थी। इस तकनीकी खामी के कारण उन्हें पीएचडी की उपाधि के लिए अयोग्य माना गया। यह घटना 20वीं सदी की शुरुआत में महिला शोधकर्ताओं के सामने आने वाली संस्थागत बाधाओं को दर्शाती है।
पीएचडी न मिलने के बावजूद, अन्ना मणि ने हार नहीं मानी और 1948 में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) में शामिल हो गईं। उन्होंने भारत को मौसम अवलोकन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी उपकरण विकसित किए। उनके काम ने सौर और पवन ऊर्जा पर भी महत्वपूर्ण शोध किया, जो आज भी भारत के मौसम पूर्वानुमान और जलवायु अनुसंधान का आधार है।
