मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र महाराष्ट्र में होने की क्या है ऐतिहासिक वजह | national news
देशभर में मुगल बादशाह औरंगजेब को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अक्सर तेज रहती है। एक तरफ जहां उनके शासन को लेकर तीखी बहस होती है, वहीं दूसरी तरफ उनकी कब्र की भौगोलिक स्थिति भी लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी रहती है। दिल्ली से लेकर आगरा तक अपनी सल्तनत का विस्तार करने वाले औरंगजेब का मकबरा महाराष्ट्र के औरंगाबाद से कुछ दूरी पर स्थित खुल्दाबाद शहर में बना हुआ है।
इतिहास के पन्नों को खंगालने पर पता चलता है कि साल 1707 में अहमदनगर में औरंगजेब का निधन हुआ था। उनके अंतिम समय की इच्छा के अनुसार ही उनके पार्थिव शरीर को खुल्दाबाद लाया गया था। औरंगजेब ने अपनी वसीयत में स्पष्ट रूप से लिखा था कि मृत्यु के पश्चात उन्हें उनके आध्यात्मिक गुरु और सूफी संत सैयद जैनुद्दीन के मकबरे के समीप ही दफनाया जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार, औरंगजेब सूफी संत सैयद जैनुद्दीन को अपना पीर मानते थे, जिनका निधन उनसे बहुत पहले हो चुका था और उनकी मजार खुल्दाबाद में ही थी। बादशाह ने अपनी सादगी और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए यह इच्छा जताई थी कि उनका मकबरा किसी आलीशान इमारत के बजाय अत्यंत साधारण रूप में इसी पवित्र स्थल के पास बनाया जाए। यह ऐतिहासिक प्रसंग मुगल काल की उन परंपराओं और मान्यताओं को दर्शाता है जो राजाओं के व्यक्तिगत जीवन और आध्यात्मिक झुकाव से जुड़ी थीं।
