आगरा में DNA से सुलझी नीले ड्रम में जलाए गए शव की गुत्थी, प्रेम प्रसंग में हुई थी हत्या | Agra crime news
आगरा में एक सनसनीखेज हत्याकांड की गुत्थी डीएनए जांच के बाद आखिरकार सुलझ गई है। प्रेम प्रसंग के शक में एक युवक की हत्या कर उसके शव को नीले ड्रम में जला दिया गया था, जिसकी पहचान पहले गलत हो गई थी। फोरेंसिक विज्ञानियों की मदद से यह जटिल मामला सुलझाया गया, जिससे पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली।
यह घटना 20 फरवरी 2024 को सैंया के कटी पुल से लादूखेड़ा लिंक मार्ग पर सामने आई, जब एक खेत में नीले ड्रम में जला हुआ शव मिला। कंकाल मात्र होने के कारण शुरुआती पहचान असंभव थी। कुछ दिनों बाद, भरतपुर के एक बर्तन व्यापारी के परिजनों ने इसे अपने लापता सदस्य रूपचंद का शव बताकर अंतिम संस्कार कर दिया, हालांकि डीएनए नमूना सुरक्षित रख लिया गया था।
इसी बीच, मलपुरा के कबूलपुर निवासी 19 वर्षीय राकेश 18 फरवरी 2024 से लापता था। उसकी बाइक खारी नदी पुल के पास लावारिस मिली थी। पुलिस ने राकेश की तलाश जारी रखी और उसके मोबाइल की सीडीआर तथा लैपटॉप की जांच की। जांच में देवीराम नामक व्यक्ति से उसकी बातचीत और एक रिश्तेदार युवती से शादी की बात सामने आई। शक गहराने पर पुलिस ने आगरा और भरतपुर में मिले अज्ञात शवों की जानकारी जुटाई।
विवेचक को पता चला कि सैंया में मिले शव का डीएनए मिलान भरतपुर पुलिस ने नहीं कराया था। इसके बाद, विवेचक ने भरतपुर पुलिस से डीएनए नमूना वापस मंगाया और राकेश के माता-पिता का नमूना लेकर फोरेंसिक लैब आगरा भेजा। सितंबर 2024 में हुई डीएनए जांच में यह पुष्टि हुई कि नीले ड्रम में जलाया गया शव राकेश का ही था। राकेश के माता-पिता के डीएनए से शव का डीएनए पूरी तरह मेल खा गया।
पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी देवीराम से पूछताछ की तो उसने अपने भतीजे नित्य किशोर के साथ मिलकर राकेश की हत्या करने की बात कबूल कर ली। उसने बताया कि युवती की शादी की बात करने के बहाने राकेश को घर बुलाया गया और फिर तार से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फोरेंसिक लैब आगरा ने पिछले तीन वर्षों में 433 जटिल मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें यह मामला सबसे चर्चित रहा। इस सफलता ने पुलिस की जांच प्रक्रिया में डीएनए तकनीक के महत्व को उजागर किया है।
