यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के जले शवों की पहचान, आगरा लैब ने 160 घंटे में निकाला DNA; Mathura accident news
मथुरा के बल्देव क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर 16 दिसंबर को हुए भीषण हादसे में कई लोगों की मौत हो गई थी। वाहनों में लगी आग के कारण शव बुरी तरह जल गए थे, जिससे उनकी पहचान करना लगभग असंभव था। आगरा फोरेंसिक लैब के वैज्ञानिकों ने जले हुए नमूनों से डीएनए निकालने की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
हादसे के बाद शवों की पहचान के लिए पुलिस ने सिर्फ हड्डियां और दांत ही नमूने के तौर पर भेजे थे। इनमें से कई नमूने इतने नाजुक थे कि छूते ही कोयले की तरह चूर-चूर हो रहे थे। संयुक्त निदेशक अशोक कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने इन नमूनों से डीएनए निकालने के लिए 160 घंटे तक लगातार काम किया।
डीएनए पहचान की चार-चरणीय तकनीक
वैज्ञानिकों ने इन अत्यधिक जले हुए नमूनों से डीएनए प्राप्त करने के लिए चार-चरणीय तकनीक का उपयोग किया।
1. डीएनए निष्कर्षण (DNA Extraction): सबसे पहले, नमूनों को केमिकल में गलाकर डीएनए निकाला गया। यह प्रक्रिया अत्याधुनिक मशीनों में की गई।
2. मात्रात्मक विश्लेषण (Quantification): इस चरण में, निकाले गए डीएनए की मात्रा निर्धारित की गई। यह सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण चरण था, क्योंकि जले हुए नमूनों से पर्याप्त मात्रा में डीएनए प्राप्त करना मुश्किल था। कई बार मशीनों को दोबारा चलाकर परिणाम हासिल किए गए।
3. पीसीआर (PCR): इस चरण में, प्राप्त डीएनए की लाखों प्रतियां बनाई गईं ताकि आगे की जांच की जा सके।
4. एनलाइजर (Analyzer): अंतिम चरण में, पीसीआर से प्राप्त डीएनए प्रोफाइल की सीक्वेंसिंग की गई और पुलिस द्वारा भेजे गए नमूनों नमूनों से उनका मिलान किया गया।
इस प्रक्रिया के तहत, वैज्ञानिक 13 नमूनों में से 11 की पहचान करने में सफल रहे। हालांकि, दो नमूने इतने बुरी तरह से क्षतिग्रस्त थे कि उनसे आंशिक परिणाम ही मिले। इन नमूनों को अब लखनऊ फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा, जहां माइटोकांड्रिया तकनीक का उपयोग करके डीएनए निकालने का प्रयास किया जाएगा।
