बच्चों में हाइड्रोसील और हर्निया: रोने पर सूजन दिखे तो तुरंत कराएं जांच, जानें infant health के लिए क्यों है जरूरी
बच्चों में रोने या डायपर बदलते समय अंडकोश में सूजन आना जन्मजात हाइड्रोसील या हर्निया का संकेत हो सकता है। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति लड़कों में अधिक पाई जाती है और माता-पिता के लिए शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण है। यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब जन्म से पहले अंडकोष पेट से अंडकोश में उतरते हैं, और जिस मार्ग से वे गुजरते हैं वह बंद नहीं होता है।
गर्भावस्था के दौरान, अंडकोष पेट से अंडकोश तक एक छोटे से मार्ग (प्रोसस वेजिनेलिस) से नीचे आते हैं। सामान्यतः यह मार्ग जन्म से पहले बंद हो जाता है। यदि यह खुला रहता है, तो तरल पदार्थ अंडकोश में जमा हो सकता है, जिससे जन्मजात हाइड्रोसील होता है। यदि आंत का हिस्सा इस खुले मार्ग से नीचे आ जाता है, तो इसे जन्मजात हर्निया कहा जाता है।
हाइड्रोसील में आमतौर पर दर्द नहीं होता है और यह बच्चे के स्वास्थ्य या प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करता है। सूजन दिन के समय या रोने पर बढ़ सकती है और सोते समय कम हो सकती है। ज्यादातर मामलों में, हाइड्रोसील एक या दो साल की उम्र तक अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि, हर्निया के मामले में स्थिति अलग होती है। इसमें आंत फंसने का जोखिम होता है, जिसके कारण तत्काल सर्जरी की आवश्यकता होती है।
यदि सूजन के साथ दर्द, लालिमा, पेट में सूजन या उल्टी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। हर्निया के लिए जल्द सर्जरी की सलाह दी जाती है ताकि आंत को नुकसान से बचाया जा सके। सर्जरी के बाद पुनरावृत्ति को रोकने के लिए मार्ग को बंद कर दिया जाता है।
यह एक विकास संबंधी स्थिति है, जिसके लिए कोई दवा उपलब्ध नहीं है। समाज में प्रचलित गलत धारणाओं, जैसे झाड़-फूंक या घरेलू उपचार पर भरोसा करने से बचना चाहिए। सही समय पर चिकित्सा सहायता लेना ही एकमात्र समाधान है।
