मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'एक जिला एक व्यंजन' योजना के तहत आगरा के खास व्यंजनों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। लखनऊ में होने वाली घोषणा में यह तय होगा कि आगरा के कौन...
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘एक जिला एक व्यंजन’ योजना के तहत आगरा के खास व्यंजनों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। लखनऊ में होने वाली घोषणा में यह तय होगा कि आगरा के कौन से व्यंजन इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होते हैं। यह पहल स्थानीय खान-पान की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देगी।
पेठा: एक ऐतिहासिक मिठास
आगरा का पेठा, जो पहले से ही ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना का हिस्सा है, अपनी अनूठी मिठास और विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। वर्ष 1865 में पहली बार बने इस व्यंजन ने समय के साथ 25 से 30 से अधिक वैरायटी अपना ली हैं, जिनमें चॉकलेट, पान और सैंडविच जैसे आधुनिक फ्लेवर भी शामिल हैं। नूरी दरवाजा इसका प्रमुख केंद्र रहा है।
दालमोंठ: नमकीन स्वाद का पर्याय
बारीक बेसन, मसूर की दाल और 14 तरह के मसालों से तैयार होने वाली दालमोंठ आगरा की एक और लोकप्रिय नमकीन है। इसमें कद्दू, तरबूज के बीज और मेवों का प्रयोग इसे खास बनाता है। सुबह के नाश्ते या शाम की चाय के साथ इसका आनंद लिया जाता है। इसका कारोबार 100 करोड़ रुपये वार्षिक है।
बेड़ई और गजक: सुबह की शुरुआत और मौसमी मिठास
शहर के लोगों के दिन की शुरुआत अक्सर गरमागरम बेड़ई के नाश्ते से होती है, जिसकी खपत प्रतिदिन एक लाख पीस तक है। वहीं, गजक का कारोबार नूरी दरवाजे पर केंद्रित है, जहां तिल, गुड़ और मूंगफली से बनी 35 से 40 तरह की गजक और चिक्की उपलब्ध हैं। इसका कारोबार तीन से चार महीने तक चलता है और प्रतिदिन 15 लाख रुपये का कारोबार होता है।
ऐतिहासिक जड़ें और वर्तमान महत्व
पेठे का इतिहास ताजमहल के निर्माण काल से जुड़ा माना जाता है, जब इसे श्रमिकों के लिए ऊर्जादायक खाद्य पदार्थ के रूप में तैयार किया गया था। आज, ये व्यंजन न केवल स्थानीय लोगों के पसंदीदा हैं, बल्कि आगरा की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जिसमें पेठा का वार्षिक कारोबार 400-500 करोड़ रुपये है।