मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों और वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू | national news
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली करीब तीन दर्जन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई शुरू हो गई है। इस कानूनी प्रक्रिया से देश की चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है, जिसका सीधा असर आगामी चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाताओं के अधिकारों पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर इन याचिकाओं में मुख्य रूप से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के नए कानून को चुनौती दी गई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, एनजीओ लोक प्रहरी और कांग्रेस नेता जया ठाकुर सहित कई पक्षों ने याचिकाएं दाखिल कर चयन समिति की संरचना पर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर केंद्रीय मंत्री को शामिल किए जाने से सरकार का दखल बढ़ गया है, जिससे आयोग की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य आयुक्तों की असहमति के बावजूद कई अहम फैसले लिए। हालांकि, चुनाव आयोग ने अपना संयुक्त हलफनामा दाखिल कर इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि एसआईआर से जुड़े तमाम आदेश सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से ही पारित किए गए हैं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर उठाए जा रहे सवाल निराधार हैं। अदालत के इस मामले में आने वाले फैसले से देश की सर्वोच्च चुनावी संस्था के कामकाज और जवाबदेही की रूपरेखा तय होगी।
