ग्रेटर नोएडा गड्ढा हादसा: SIT जांच से मिलेगा युवराज को इंसाफ या फाइलों में दफन होगा मामला?
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में एक दर्दनाक हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई। घर से कुछ ही दूरी पर सड़क पर बने गहरे गड्ढे में उनकी कार गिर गई। पिता राजकुमार मेहता ने बेटे को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही के चलते वे सफल नहीं हो सके। घटना के वक्त मौके पर मौजूद लोगों और अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
युवराज मेहता, जो कोरोना महामारी में अपनी मां को खो चुके थे, अपने पिता के साथ रहते थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे गुरुग्राम की एक कंपनी में कार्यरत थे। हादसे की रात वे ऑफिस से घर लौट रहे थे। घना कोहरा और सड़क पर चेतावनी बोर्डों की कमी के कारण वे सड़क पर बने पानी से भरे गड्ढे को देख नहीं पाए और कार उसमें जा गिरी।
सूचना मिलने के बावजूद आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (Emergency Response System) तुरंत सक्रिय नहीं हुई। पुलिस और फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचने में काफी देर लगी। इस बीच, एक डिलीवरी बॉय मुनेंद्र ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण के पानी में कूदकर युवराज को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी सफल नहीं हो सका। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें जब तक पहुंचीं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और युवराज की मौत हो गई।
इस घटना ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पिता राजकुमार मेहता ने आरोप लगाया है कि मौके पर मौजूद भीड़ तमाशबीन बनी रही और अधिकारी भी मदद के लिए तत्पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि अगर समय पर उचित संसाधन उपलब्ध होते तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी। डिलीवरी बॉय मुनेंद्र ने भी फायर ब्रिगेड की निष्क्रियता और पुलिस द्वारा कथित तौर पर स्क्रिप्टेड वीडियो रिकॉर्ड कराने का आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद इस मामले की जांच के लिए एक SIT (Special Investigation Team) का गठन किया गया है। यह SIT उन लापरवाह अफसरों की पहचान करेगी जो इस दुखद हादसे के लिए जिम्मेदार हैं। अब देखना यह है कि क्या यह जांच युवराज मेहता को इंसाफ दिला पाएगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। इस घटना ने यह सवाल जरूर उठाया है कि क्या इंसानी जान की कीमत कार्रवाई से पहले नहीं होती?
