लखनऊ के 88 गांवों में सरकारी संपत्तियों का होगा कायाकल्प, खुलेंगे स्कूल-कॉलेज
लखनऊ नगर निगम अब अपने विस्तारित क्षेत्र के 88 गांवों में वर्षों से अनुपयोगी पड़ी सरकारी संपत्तियों को नए स्वरूप में विकसित करेगा। इस संबंध में किए गए सर्वे में ऐसी 56 बड़ी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जिन्हें आवश्यकतानुसार स्कूल, कल्याण मंडप, नगर निगम कार्यालय और स्टोर के रूप में विकसित किया जाएगा। अधिकारियों ने इन संपत्तियों का स्थलीय निरीक्षण भी शुरू कर दिया है।
सरकारी संपत्तियों का पुन: उपयोग
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, निगम के पास आई ऐसी सरकारी संपत्तियां जिनका वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें संरक्षित करने के साथ-साथ उनका सुंदरीकरण भी किया जाएगा। स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनका पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो सकें। सर्वे में सबसे अधिक पंचायत भवन, कम्युनिटी सेंटर और बारात घर जैसी इमारतें चिन्हित हुई हैं। अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि इन निर्मित भवनों का उपयोग कल्याण मंडप, स्टोर और नगर निगम कार्यालय के रूप में किया जाएगा। साथ ही, अन्य खाली पड़ी जमीनों पर आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप ऐसे संस्थान विकसित किए जाएंगे जो भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
पुराने वार्डों में भी होगा सर्वे
अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता ने यह भी बताया कि नगर निगम अब पुराने वार्डों में भी इसी तरह का सर्वे कराएगा। इसका उद्देश्य ऐसी सरकारी संपत्तियों को चिन्हित करना है जो वर्षों से बेकार पड़ी हैं। नउवा खेड़ा का कम्युनिटी सेंटर और भिंडौली रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित पुराना कार्यालय भी नगर निगम के उपयोग में लाया जा सकता है। इससे न केवल सरकारी संपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि स्थानीय लोगों को नई सुविधाएं भी मिलेंगी।
शिक्षा के क्षेत्र में होगा उपयोग
नगर निगम में शामिल 88 गांवों की बड़ी और खाली पड़ी संपत्तियों का उपयोग अब विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में किया जाएगा। नगर निगम ने ऐसे भूखंडों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है, जहां भविष्य में इंटरमीडिएट स्कूल और डिग्री कॉलेज खोले जा सकेंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पिछड़े इलाकों के बच्चों को बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अपर नगर आयुक्त अरुण गुप्ता ने बताया कि फिलहाल कल्ली पश्चिम, बिजनौर और जोन-3 के तिवारीपुर में बड़ी खाली जमीनें चिह्नित की गई हैं। इन स्थानों पर बड़े स्कूल और डिग्री कॉलेज स्थापित करने की योजना तैयार की जा रही है। शुरुआत किसी एक स्थान से की जाएगी, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य जगहों पर भी शैक्षणिक संस्थान विकसित किए जाएंगे।
पिछड़े इलाकों को मिलेगा लाभ
अरुण गुप्ता ने बताया कि जिन क्षेत्रों का चयन किया गया है, वे अपेक्षाकृत पिछड़े हैं और वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थानों की कमी है। स्कूल और कॉलेज खुलने से आसपास के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा। साथ ही, इन इलाकों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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