सैटेलाइट को चकमा देने के लिए किसानों का ‘5 बजे का ट्रिक’, ISRO-NASA ने बताया 2025 सबसे खराब साल
सरकारी दावों के विपरीत, ISRO के विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आई है, बल्कि किसानों ने सैटेलाइट की निगरानी से बचने के लिए आग लगाने का समय बदल दिया है। ISRO के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के चार शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि किसान अब शाम 5 बजे के आसपास पराली जला रहे हैं, ताकि ध्रुवीय-कक्षा वाले सैटेलाइट उनका पता न लगा सकें।
ISRO के शोधकर्ताओं ने बताया कि 2020 में पीक फायर एक्टिविटी दोपहर 1:30 बजे थी, जो 2024 में बदलकर शाम 5 बजे हो गई है। यह बदलाव सैटेलाइट की निगरानी से बचने के लिए किया गया है।
NASA के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिक हिरेन जेठवा ने भी इस बात का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में ‘92% कमी’ के दावे झूठे और भ्रामक हैं, क्योंकि ये NASA-NOAA सैटेलाइट देर शाम की आग को पकड़ नहीं पाते हैं। जेठवा ने एक्स पर पोस्ट किया कि 15 साल के स्मोक एयरोसोल लोडिंग रिकॉर्ड के अनुसार, 2025 पिछले 15 सालों में तीसरा सबसे खराब साल हो सकता है, जो 2019 और 2024 के बाद आता है।
हालांकि, सरकार का दावा है कि 2025 में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 2022 की तुलना में 90% की कमी आई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 2 दिसंबर को लोकसभा में यह जानकारी दी थी।
पराली जलाने की यह प्रथा हर साल सितंबर से नवंबर तक चलती है और यह दिल्ली-एनसीआर में नवंबर-दिसंबर के दौरान वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनती है।
