होली से पहले 76 हजार घरों की बिजली कटी, नई दरों पर 9 मार्च को सुनवाई: smart meter issues
त्योहारों के मौसम में बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा है, जब होली से ठीक पहले करीब 76 हजार से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले घरों की बिजली काट दी गई। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अनुसार, यह कार्रवाई तब की गई जब कई उपभोक्ताओं के मीटर बैलेंस पॉजिटिव थे, जिससे लोगों में नाराजगी है। नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले की गहन जांच की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि त्योहारों के समय इस तरह की कार्रवाई पावर कॉरपोरेशन के लिए अनुचित है। उन्होंने पावर कॉरपोरेशन के सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई उपभोक्ताओं को अपने मीटर रिचार्ज करने के बावजूद बैलेंस अपडेट नहीं मिलता, और कुछ मामलों में पॉजिटिव बैलेंस होने पर भी मीटर माइनस दिखा रहा है। इसे उपभोक्ताओं के साथ घोर अन्याय बताया गया है।
यह पहली बार नहीं है जब प्रीपेड मीटर को लेकर समस्याएं सामने आई हैं। इससे पहले जन्माष्टमी के दौरान भी ऐसी ही दिक्कतें हुई थीं, जिसके कारण योजना को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। इस बार की कार्रवाई ने त्योहार की खुशियों को प्रभावित किया है।
बिजली की नई दरों के निर्धारण के लिए नियामक आयोग 9 मार्च से सुनवाई शुरू करेगा। इस सुनवाई का एक महत्वपूर्ण एजेंडा स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं से पैसा वसूलने का प्रस्ताव है, जिसका उपभोक्ता परिषद ने कड़ा विरोध करने की घोषणा की है। परिषद का तर्क है कि केंद्र सरकार ने योजना को मंजूरी देते समय यह स्पष्ट किया था कि मीटर की लागत उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे पर और प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए 18,885 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने 27,342 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए। इस अतिरिक्त लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए। परिषद इस प्रस्ताव का तथ्यात्मक विरोध करेगी। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में बदलना विद्युत अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।
उपभोक्ताओं में स्मार्ट मीटर को लेकर कई भ्रांतियां हैं। परिषद इन भ्रांतियों और वास्तविकताओं पर एक रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही, उपभोक्ता परिषद बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के 50 हजार करोड़ रुपये के बकाया के आधार पर बिजली दरों में कमी का प्रस्ताव भी दाखिल करेगी। यह कदम उपभोक्ताओं को राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास होगा।
