पाकिस्तान में गहराता आर्थिक संकट, क्षेत्रीय गरीबों का आधा हिस्सा देश में | international news
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक तरफ जहां कागजी विकास के आंकड़ों का दावा कर रही है, वहीं आम नागरिक की जेब का हिसाब बद से बदतर होता जा रहा है। महंगाई, आसमान छूती ईंधन की कीमतें और घटते रोजगार के अवसरों ने देश की बहुसंख्यक आबादी को गहरी आर्थिक तंगी में धकेल दिया है। वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के हालिया आंकलन बताते हैं कि इस व्यापक क्षेत्र में रोजाना तीन डॉलर से कम पर गुजर करने वाले गरीबों का लगभग आधा हिस्सा केवल पाकिस्तान में निवास करता है।
देश में गरीबी का दायरा घटने के बजाय लगातार फैलता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान गरीबी की दर में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है। कोरोना महामारी के प्रभावों और वर्ष 2022 की भीषण बाढ़ ने कृषि और बुनियादी ढांचे को जो नुकसान पहुंचाया, उससे उबरना देश के लिए मुश्किल साबित हुआ है। इसके अलावा कमजोर होती मुद्रा और लंबे समय से जारी वित्तीय सुधारों के बोझ ने आम परिवारों की कमर तोड़ दी है। स्थिति यह है कि गरीब परिवारों को अपनी आय का आधा हिस्सा केवल भोजन और बुनियादी जरूरतों पर खर्च करना पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों के कारण ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की उपभोग की वस्तुओं पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने व्यापक सब्सिडी के बजाय लक्षित आर्थिक सहायता यानी डायरेक्ट कैश ट्रांसफर जैसी ठोस नीतियां नहीं अपनाईं, तो सामाजिक अशांति और भुखमरी का संकट और विकराल रूप ले सकता है।
