माघ स्नान के बाद गंगा में फिर लौटी गंदगी, टेनरियों का केमिकल बहाव बना बड़ी समस्या
माघ मेले के पहले स्नान पर्व के दौरान टेनरियों को बंद रखने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित जल गंगा में प्रवाहित होने से नदी की स्थिति सुधरी थी। हालांकि, पर्व समाप्त होते ही हालात फिर बिगड़ गए हैं। मंगलवार को एसटीपी के इनलेट पर जानवरों की खाल और गंदगी पाई गई, जो टेनरियों के रासायनिक उत्प्रवाह के कारण है।
टेनरियों का यह रासायनिक कचरा घरेलू नालों के माध्यम से जाजमऊ स्थित 130 और 43 एमएलडी एसटीपी तक पहुंचता है। इससे इनलेट पर केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) मानक से कई गुना अधिक हो जाती है। दिसंबर की शुरुआत में सीओडी 1638 मिग्रा प्रति लीटर तक दर्ज की गई थी, जो मानक (600 मिग्रा प्रति लीटर) से ढाई गुना अधिक है। इस बढ़ी हुई सीओडी के कारण एसटीपी में शोधन प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है, जिससे दूषित जल खेतों के रास्ते गंगा में गिरता है।
माघ मेले के दौरान, 31 दिसंबर से सभी टेनरियों और उद्योगों को बंद कर दिया गया था। इस अवधि में एसटीपी के इनलेट पर सीओडी घटकर अधिकतम 461 मिग्रा प्रति लीटर रह गई थी, जो मानक से कम थी। इससे सीवरेज के जैविक शोधन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चली और फेकल कोलीफॉर्म में भी कमी आई। मेले के दौरान 1 और 2 जनवरी को 130 और 43 एमएलडी एसटीपी पर फेकल कोलीफॉर्म 1000 एमपीएन प्रति 100 मिली के मानक की तुलना में क्रमशः 630 और 580 एमपीएन प्रति 100 मिली दर्ज किया गया।
परियोजना प्रबंधक जल निगम ग्रामीण, मोहित चक के अनुसार, “टेनरियों का रासायनिक उत्प्रवाह माघ मेले के पहले स्नान पर्व पर रुका तो एसटीपी के इनलेट पर सीओडी मानक से कम दर्ज किया गया। इससे शोधन कार्य बढ़िया हुआ। आउटलेट से स्वच्छ पानी छोड़ा गया, जो खेतों से होकर गंगा में जाता है।”
गंगा नदी में प्रदूषण का यह चक्र आम जनता के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह न केवल जलीय जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि पेयजल स्रोतों को भी दूषित कर सकता है।
