उत्तर प्रदेश विधानसभा में जनप्रतिनिधियों पर दर्ज `UP COVID cases` वापस लेने की मांग, सरकार करेगी समीक्षा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कोविड-19 महामारी के समय जनप्रतिनिधियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग जोर पकड़ रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक फहीम इरफान ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम नागरिकों पर दर्ज कई `UP COVID cases` सरकार ने वापस ले लिए थे, लेकिन जनप्रतिनिधियों के मामलों में अब तक कोई स्पष्ट नीति नहीं बनी है। यह मुद्दा राज्य की न्याय प्रणाली में समानता और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़ा है, जिस पर सरकार को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
विधायक इरफान ने सदन को बताया कि कोरोना काल में लागू प्रतिबंधों और नियमों के उल्लंघन के आरोप में कई लोगों पर मामले दर्ज हुए थे। बाद में, परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने आम लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने का निर्णय लिया। हालांकि, जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों को लेकर स्थिति अभी भी अस्पष्ट है, जिससे उनके बीच असमानता की भावना पैदा हो रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए और समानता के आधार पर निर्णय लिया जाए।
इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी संज्ञान लिया। उन्होंने सरकार को मामले की गहन समीक्षा करने के निर्देश दिए। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि पहले जारी आदेशों में जनप्रतिनिधि किसी कारणवश शामिल नहीं हो पाए हैं या छूट गए हैं, तो उस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से पूरे मामले का परीक्षण कर न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने को कहा।
अध्यक्ष के निर्देशों के बाद, सरकार की ओर से सदन को आश्वासन दिया गया कि कोविड काल में दर्ज मुकदमों की वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाएगी। यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन मामलों को वापस लिया गया है और किन्हें नहीं। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में क्या नीति अपनाई जा सकती है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी 25 जनप्रतिनिधियों पर कोरोना गाइडलाइंस उल्लंघन के तहत दर्ज मुकदमे वापस लेने की अनुमति दी थी, जिससे इस दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है। इस चर्चा के बाद उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लेकर स्थिति को साफ करेगी।
