कानपुर में राष्ट्रभाषा हिंदी पर वाद-विवाद प्रतियोगिता, एकता पर जोर
कानपुर में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज में शनिवार को ‘राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी : विविधता में एकता की अवधारणा’ विषय पर एक महत्वपूर्ण संविधान सभा वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भाषाई एकता और राष्ट्रीय सामंजस्य को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में उपस्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कानपुर नगर शेष बहादुर निषाद ने हिंदी भाषा की संवैधानिक स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय एकता की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने वाला एक सशक्त पुल है। उन्होंने अनुच्छेद 14, 29 और 351 के संदर्भ में भाषाई अधिकारों, समावेशिता और राष्ट्रीय एकता के महत्व को समझाया।
अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय राजीव महेश्वरम ने भारत की पहचान को उसकी ‘विविधता में एकता’ में निहित बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान भाषाई और सांस्कृतिक बहुलता का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का कार्य करता है। प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने संविधान सभा में राष्ट्र की भाषा पर हुई चर्चा को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा बताया, जो मतभिन्नता और मतांतर के सम्मान को सिखाती है।
इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। छात्र अविरल शुक्ला को आरवी धुलेकर की भूमिका के लिए बेस्ट कॉन्स्टीट्यूएंट असेंबली मेंबर चुना गया। छात्रा समृद्धि तिवारी को केएम मुंशी की भूमिका में डॉ. बीआर अंबेडकर अवार्ड फॉर कॉन्स्टीट्यूशनल एक्सीलेंस से नवाजा गया। रक्षा सिंह राठौर को राजकुमारी अमृत कौर की भूमिका में बेस्ट ओरेटर ऑफ द कांस्टीट्यूएंट असेंबली चुना गया। अजीता और विदुषी शुक्ला को क्रमशः फ्रैंक एंथनी और गोपालस्वामी अय्यंगार की भूमिका में माननीय उल्लेख से सम्मानित किया गया। संस्थान की निदेशक डॉ. स्मृति राय ने संवाद और संवैधानिक चेतना के महत्व पर बल देते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
