दिल्ली के तीनों ISBT पर EV चार्जिंग सुविधा, 2026 तक 8000 ई-बसें चलाने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस पहल के तहत, दिल्ली के तीन प्रमुख अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों (ISBT) – कश्मीरी गेट, सराय काले खां और आनंद विहार – पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अनुमानित 16.99 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसका लक्ष्य 2026 तक दिल्ली की सड़कों पर 8,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाना है।
दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम (DITDC) ने इस परियोजना के लिए निविदाएं जारी कर दी हैं। इन निविदाओं में चार्जर और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे की आपूर्ति और स्थापना शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए नागरिक बुनियादी ढांचे का निर्माण, सबस्टेशनों की स्थापना और विभिन्न क्षमता वाले चार्जर लगाना शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि इसमें 1,600 केवीए, 11 केवी/433 वोल्ट का एक कॉम्पैक्ट सबस्टेशन और 60 किलोवाट एवं 240 किलोवाट के चार्जर शामिल होंगे, जो सैकड़ों बसों को कुशलतापूर्वक चार्ज करने में सक्षम होंगे। सफल बोली प्रक्रिया के बाद अगले कुछ महीनों में सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
यह पहल दिल्ली सरकार की व्यापक योजना का एक अभिन्न अंग है, जिसके तहत अगले डेढ़ साल के भीतर सार्वजनिक परिवहन बेड़े को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली में पहले से ही अंतरराज्यीय इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार इस बदलाव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार का मानना है कि ई-बसों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ मजबूत चार्जिंग नेटवर्क का होना अनिवार्य है।
वर्तमान में, दिल्ली में लगभग 3,400 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर चल रही हैं। आने वाले महीनों में इस संख्या को बढ़ाकर 6,000 करने की योजना है, और अंततः 2026 तक इसे 8,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। ई-बसों का यह विस्तार न केवल शहर में वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी लाएगा, जिससे दिल्लीवासियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिलेगा।
इस परियोजना के साथ-साथ, दिल्ली सरकार अपनी नई ईवी नीति-2 का मसौदा भी तैयार कर रही है, जिसके लिए एक 10 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह नीति इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन प्रदान कर सकती है, जिससे निजी ईवी अपनाने को भी बढ़ावा मिलेगा। इन कदमों से दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगी।
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