दिल्ली धमाका: ‘व्हाइट कॉलर’ मॉड्यूल का पर्दाफाश, आतंकी साजिश में शामिल कौन?
दिल्ली में हुए धमाके के बाद ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसने जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम किया। सूत्रों के अनुसार, इस मॉड्यूल के सदस्यों की भूमिकाएं स्पष्ट थीं, जो रसद से लेकर बम बनाने तक के कार्यों में शामिल थे।
आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी समेत सभी प्रमुख संदिग्धों की भूमिकाएं परिभाषित थीं। सूत्रों ने बताया कि इन आतंकियों का लक्ष्य दिल्ली में दहशत फैलाना था। इस मॉड्यूल को फंड जुटाने, बम बनाने और नए सदस्यों की भर्ती करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कुछ सदस्य हवाला के माध्यम से पैसे जुटाते थे, जबकि अन्य आईईडी बनाने में माहिर थे।
इस मामले में जम्मू-कश्मीर निवासी मौलवी इरफान अहमद की भूमिका अहम थी। वह युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ने का काम करता था। इरफान अहमद के कई जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादियों से सीधे संबंध थे। उसने डॉक्टरों की भर्ती की और ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल बनाया।
फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एक डॉक्टर, मुजम्मिल शकील को मौलवी ने सबसे पहले भर्ती किया था। शकील ने यूनिवर्सिटी में अन्य ‘समान विचारधारा वाले’ डॉक्टरों को भर्ती किया, जिनमें मुजफ्फर अहमद, अदील अहमद राथर और शाहीन सईद शामिल थे। शाहीन सईद ने मॉड्यूल के लिए फंड जुटाया और गरीब महिलाओं व लड़कियों को जैश-ए-मोहम्मद की महिला इकाई, जमात-उल-मुमिनात से जोड़ा। उसने फरीदाबाद मॉड्यूल के लिए लगभग 20 लाख रुपये का फंड जुटाया।
जम्मू-कश्मीर का रहने वाला आमिर राशिद अली ने आत्मघाती हमलावर को 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद की। अली को एनआईए ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उसने आत्मघाती हमलावर द्वारा इस्तेमाल की गई i20 कार का इंतजाम किया था। पुलिस मॉड्यूल के सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है। जांच जारी है और जल्द ही और खुलासे होने की संभावना है।
