बिजली वसूली पर आयोग का फैसला, जून और जुलाई दोनों की गणना पर होगा असर
नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में बिल में हो रही 10% अतिरिक्त वसूली पर पावर कॉरपोरेशन के जवाब का परीक्षण शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही आयोग अपना फैसला सुनाएगा, जिसका असर न केवल जून बल्कि जुलाई की वसूली पर भी पड़ेगा।
पावर कॉरपोरेशन ने हाल ही में जून के बिजली बिलों में 10% ईंधन अधिभार शुल्क जोड़ा था। इस कदम पर कई आपत्तियां उठने के बाद नियामक आयोग ने हस्तक्षेप किया और पावर कॉरपोरेशन से जवाब मांगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने बकाया भुगतान के एवज में ईंधन अधिभार शुल्क लेना उचित नहीं है, क्योंकि बहुवर्षीय टैरिफ नियम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। कॉरपोरेशन को 19 जून तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
पावर कॉरपोरेशन का जवाब मिलने के बाद, आयोग ने इसका गहन परीक्षण शुरू कर दिया है। इस परीक्षण में उस राशि का आकलन किया जा रहा है जिसे पावर कॉरपोरेशन ने पुराने बकाया भुगतान को जोड़कर दिखाया है। सूत्रों के अनुसार, यह राशि लगभग 1400 करोड़ रुपये है। ईंधन अधिभार शुल्क की गणना में उपयोग की जाने वाली राशि के आधार पर ही नई गणना की जाएगी। पावर कॉरपोरेशन ने कुल अधिभार 20.61% आंका था, जिसमें से 10% की वसूली जून में और शेष 10% की वसूली जुलाई में होनी थी। आयोग द्वारा पूरी गणना का पुनर्निर्धारण करने से न केवल जून में हो रही वसूली, बल्कि जुलाई की गणना भी प्रभावित होगी। इस फैसले का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि यह बिजली की लागत को प्रभावित करेगा।
