चिरंजीवी की ‘माना शंकर वर प्रसाद गारू’ बनी सबसे बड़ी तेलुगु फिल्म, बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई
चिरंजीवी के लिए यह संक्रांति बेहद यादगार साबित हुई है। उनकी पारिवारिक मनोरंजक फिल्म ‘माना शंकर वर प्रसाद गारू’ बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट साबित हुई है। दर्शकों के अपार प्रेम से सराबोर इस फिल्म ने त्योहार के दौरान सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी है। निर्देशक अनिल रविपुडी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संक्रांति पर उनके निर्देशन वाली फिल्में दर्शकों को खूब पसंद आती हैं। वहीं, चिरंजीवी ने इस फिल्म से शानदार वापसी करते हुए अपनी स्टारडम को फिर से मजबूत किया है।
फिल्म ने रिलीज के 13वें दिन भी 12वें दिन की तुलना में बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में वृद्धि दर्ज की है। सप्ताहांत के कारण यह बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, संक्रांति की छुट्टियां अब समाप्त हो गई हैं, इसलिए फिल्म की कमाई अब पूरी तरह से इसकी कहानी, मनोरंजन और दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। वर्तमान रुझानों के अनुसार, फिल्म ने 13वें दिन भारत में लगभग ₹4-5 करोड़ का कारोबार किया।
13 दिनों के बाद, ‘माना शंकर वर प्रसाद गारू’ का कुल भारतीय सकल कलेक्शन लगभग ₹220 करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, फिल्म ने विदेशों में लगभग ₹43 करोड़ का कारोबार किया है। इसके साथ ही फिल्म का कुल विश्वव्यापी कलेक्शन लगभग ₹260 करोड़ तक पहुंच गया है। इस उपलब्धि के साथ, चिरंजीवी ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है क्योंकि फिल्म ने अपने पिछले बड़े हिट ‘सई रा नरसिम्हा रेड्डी’ के लाइफटाइम कलेक्शन को पार कर लिया है। अब यह चिरंजीवी के करियर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है।
एक और बड़ी बात यह है कि ‘माना शंकर वर प्रसाद गारू’ केवल तेलुगु भाषा में ही रिलीज हुई है। आजकल ज्यादातर बड़ी फिल्में कई भाषाओं में डब होकर रिलीज होती हैं, लेकिन इसके बावजूद इस फिल्म ने शानदार कलेक्शन किया है। केवल तेलुगु भाषा में रिलीज हुई फिल्मों की बात करें तो यह अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्म बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड अल्लू अर्जुन की ‘अला वैकुंठपुरमुलू’ के नाम था, जिसने विश्व स्तर पर लगभग ₹251 करोड़ की कमाई की थी।
हालांकि, इतनी बड़ी सफलता के बावजूद, फिल्म के लिए ₹300 करोड़ का विश्वव्यापी आंकड़ा छूना थोड़ा मुश्किल लग रहा है। ₹275 करोड़ तक पहुंचना भी आसान नहीं होगा। फिर भी, जिस तरह से फिल्म ने अब तक प्रदर्शन किया है, वह चिरंजीवी और अनिल रविपुडी दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस फिल्म की सफलता से तेलुगु फिल्म उद्योग को एक नई ऊर्जा मिली है और यह साबित होता है कि अच्छी कहानियों वाली फिल्में हमेशा दर्शकों का दिल जीतती हैं।
