CBSE का बड़ा फैसला: अब छठी से आठवीं तक कौशल शिक्षा होगी अनिवार्य
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। अब से, बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए कौशल शिक्षा (Skill Education) एक अनिवार्य विषय होगी। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें वास्तविक जीवन में उपयोगी व्यावहारिक कौशल सिखाना है।
CBSE के अधिकारियों के अनुसार, स्कूलों को अब कौशल-आधारित शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना होगा, न कि इसे एक वैकल्पिक विषय मानना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, बोर्ड ने इस शैक्षणिक सत्र से एनसीईआरटी द्वारा विकसित ‘स्किल बोध’ नामक पुस्तक श्रृंखला को लागू करना अनिवार्य कर दिया है। ये पुस्तकें प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों में उपलब्ध हैं।
नई ‘स्किल बोध’ श्रृंखला के तहत, छात्रों को तीन वर्षों (कक्षा 6, 7 और 8) में कुल नौ प्रोजेक्ट पूरे करने होंगे। इन प्रोजेक्ट्स में लगभग 270 घंटे का व्यावहारिक कार्य शामिल होगा। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर ही आगे न बढ़ें, बल्कि उनके सीखने का आधार उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य और उनके अनुभव भी हों। इस पहल के अंतर्गत पौधों की देखभाल, जानवरों का प्रबंधन, बुनियादी यांत्रिक कार्य और मानव सेवा जैसे विभिन्न व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएंगे।
कौशल शिक्षा की इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, CBSE, NCERT और PSSIVE मिलकर शिक्षकों के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। शैक्षणिक वर्ष के अंत में, स्कूलों में एक ‘स्किल्स फेयर’ (कौशल मेला) आयोजित किया जाएगा। इस मेले में छात्र अपने द्वारा किए गए प्रोजेक्ट्स, मॉडल और सीखे हुए अनुभवों को प्रस्तुत करेंगे। यह स्कूलों के लिए एक अनूठा वार्षिक आयोजन होगा, जहाँ अभिभावक भी अपने बच्चों की किताबी शिक्षा के अलावा अन्य सीखने की क्षमताओं को देख सकेंगे।
कौशल शिक्षा के मूल्यांकन के तरीके में भी बदलाव किया गया है। अब यह पारंपरिक परीक्षाओं से हटकर अधिक व्यावहारिक होगा। इसमें लिखित परीक्षा के लिए 10 प्रतिशत अंक, वाइवा या प्रेजेंटेशन के लिए 30 प्रतिशत, एक्टिविटी बुक के लिए 30 प्रतिशत, पोर्टफोलियो के लिए 10 प्रतिशत और शिक्षक अवलोकन (Teacher Observation) के लिए 20 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। यह कदम छात्रों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
