पीजीआई लखनऊ में ब्रेन डेड मरीज ने दिया तीन को नया जीवन, ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचाए गए अंग | Lucknow news
लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में एक सड़क हादसे के शिकार ब्रेन डेड मरीज ने तीन जरूरतमंदों को नया जीवन दिया है। इस ऐतिहासिक अंगदान के तहत लिवर और दो गुर्दों का प्रत्यारोपण किया गया, जबकि कॉर्निया से दो लोगों को आंखों की रोशनी मिली। यह घटना चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगी। यह खबर पूरे Lucknow news में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सुल्तानपुर रोड, अहिमामऊ निवासी 42 वर्षीय चालक 7 फरवरी को बिजली बिल जमा करने जा रहा था, तभी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया। कई अस्पतालों में इलाज के बाद शनिवार शाम उसे पीजीआई ट्रॉमा सेंटर लाया गया। रविवार सुबह डॉक्टरों ने उसे ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया। मरीज की पत्नी ने अंगदान का साहसिक फैसला लिया, जिससे तीन परिवारों को उम्मीद की नई किरण मिली।
पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गुर्दे निकाले, जिन्हें 10 वर्षों से डायलिसिस पर चल रही उन्नाव और मैनपुरी की दो महिला रोगियों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। गैस्ट्रो सर्जन टीम ने लिवर निकाला। इसके बाद, यातायात पुलिस की मदद से एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। एम्बुलेंस ने लिवर और दोनों कॉर्निया को मात्र 18 मिनट में पीजीआई से केजीएमयू तक पहुंचाया।
केजीएमयू में भर्ती एक मरीज में लिवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई, जबकि दोनों कॉर्निया नेत्र रोग विभाग के आई बैंक को सौंप दिए गए, जिनसे दो जरूरतमंदों को आंखों की रोशनी मिलेगी। पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमान ने इस उपलब्धि पर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को बधाई दी है। यह घटना अंगदान की महत्ता को रेखांकित करती है और समाज में ऐसे नेक कार्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। मृतक अपने पीछे पत्नी और आठ वर्षीय बेटे को छोड़ गया है।
