उत्तर प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी सौगात: कैशलेस इलाज और 1.5 करोड़ का बीमा कवर
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा के साथ 1.5 करोड़ रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ उच्च शिक्षा विभाग ने इस योजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह योजना केवल शिक्षकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें 50 हजार से अधिक शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है, जिससे प्रदेश के लगभग 10 लाख लोगों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में शिक्षकों के परिवारों को ₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़ तक की आर्थिक सहायता, ₹60,000 तक का नकद अस्पताल लाभ और ₹12 लाख तक का टर्म लाइफ बीमा कवर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने निजी विश्वविद्यालयों और स्ववित्त पोषित संस्थानों के शिक्षकों को भी इस बीमा कवर से पूरी तरह जोड़ने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना के तहत, प्रदेश के विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और स्ववित्तपोषित संस्थानों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों को लाभ मिलेगा। प्रत्येक पात्र परिवार को सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि लाभार्थी कार्ड बनने के पहले दिन से ही इसका उपयोग कर सकेंगे। योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।
इस योजना का संचालन साचीज संस्था द्वारा किया जाएगा और इसमें आयुष्मान भारत योजना की दरें लागू होंगी। पैनल में शामिल सरकारी और निजी अस्पतालों में 1900 से अधिक बीमारियों के इलाज के पैकेज उपलब्ध होंगे, जिनमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी की समस्या और बड़ी सर्जरी जैसे गंभीर और महंगे इलाज भी शामिल हैं। सभी जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर कार्ड वितरित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहों से युवाओं को बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गूगल या सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर जानकारी प्रामाणिक नहीं होती और शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को सत्य और असत्य का फर्क समझाएं। उन्होंने देश विरोधी ताकतों और उनसे मिल रही चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की भी बात कही।
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