UP सरकार का बड़ा फैसला: अब कम जमीन पर भी बनेंगे PMAY अपार्टमेंट, UP builders को राहत
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी-2 (PMAY-U 2.0) के तहत किफायती आवास निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत, अब बिल्डरों को आवासीय योजनाएं लाने के लिए न्यूनतम 3 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जबकि पहले यह सीमा अधिक थी। सरकार ने यह कदम बिल्डरों को कम भूमि पर भी अपार्टमेंट बनाने की अनुमति देकर किफायती आवास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से उठाया है।
नए शासनादेश के अनुसार, EWS मकानों की कीमत 9 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 2.5 लाख रुपये का अनुदान देगी। विशेष फोकस समूहों के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों को 30 हजार रुपये और एकल महिलाओं को 20 हजार रुपये की अतिरिक्त छूट भी मिलेगी। केवल EWS मकान बनाने वाले बिल्डरों से वाह्य विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बिल्डरों के लिए पात्रता और समय सीमा
योजना के तहत बिल्डरों की नेटवर्थ उनकी परियोजना के आकार पर निर्भर करेगी। 3 हेक्टेयर तक की योजना के लिए बिल्डर की नेटवर्थ 2 करोड़ रुपये, 3 से 5 हेक्टेयर के लिए 5 करोड़ रुपये और 10 हेक्टेयर से अधिक की योजना के लिए 1 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए। सभी आवासीय इकाइयों में 10 प्रतिशत EWS और LIG मकान अनिवार्य होंगे।
निर्माण कार्य की समय सीमा भी निर्धारित की गई है। चार फ्लोर तक के निर्माण को 24 माह में पूरा करना होगा, जबकि इससे अधिक फ्लोर वाले निर्माण के लिए 36 माह की समय सीमा तय की गई है। बिल्डरों को रेरा पंजीकरण की सभी शर्तों का पालन करना होगा और हर तीन माह में प्रगति रिपोर्ट रेरा को देनी होगी।
आवंटन के नियम और प्राथमिकता
EWS मकानों के लिए पात्र परिवार वह होंगे जिनके पास देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं है। लाभार्थी परिवार में पति, पत्नी, अविवाहित पुत्र और अविवाहित पुत्री शामिल होंगे। मकानों का आवंटन महिला मुखिया या पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर किया जाएगा। यदि परिवार में वयस्क महिला सदस्य नहीं है, तो पुरुष के नाम पर आवंटन किया जा सकता है।
आवंटन में विधवाओं, एकल महिलाओं, दिव्यांग व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर्स, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल PMAY-U 2.0 पर लिए जाएंगे और आवंटन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
शुल्क और सब्सिडी
योजना के तहत 30 वर्ग मीटर तक के मकानों की कीमत 9 लाख रुपये होगी। केंद्र और राज्य सरकार का 2.5 लाख रुपये का अनुदान लाभार्थियों को अधिकतम एक माह में जारी किया जाएगा। EWS मकानों की रजिस्ट्री 500 रुपये के स्टांप पर की जाएगी। गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और गौतमबुद्धनगर जैसे प्रमुख शहरों में वाह्य विकास शुल्क 50 प्रतिशत लिया जाएगा, जबकि अन्य शहरों में यह 25 प्रतिशत होगा।
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