केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अब 45 किलो की जगह 40 किलो की Urea bag, जानिए किसानों पर क्या होगा असर
केंद्र सरकार ने यूरिया के अनियंत्रित उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब किसानों को यूरिया की 45 किलो की बोरी के बजाय 40 किलो का पैकेट मिलेगा। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने इस कदम को खेती और किसानों के लिए राहत बताया है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की लागत बढ़ सकती है।
नए नियम के तहत, 40 किलो के यूरिया पैकेट में 17% सल्फर मिश्रित होगा। सरकार ने 40 किलो के इस नए पैकेट का मूल्य 254 रुपये निर्धारित किया है, जबकि 45 किलो के पुराने पैकेट का दाम 266 रुपये 50 पैसे था। सल्फर मिश्रित होने के कारण यह नया यूरिया पैकेट फसलों के लिए अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।
यूरिया के वजन में लगातार कटौती
यूरिया के पैकेट के वजन में यह दूसरी कटौती है। मार्च 2018 तक यूरिया के एक पैकेट का वजन 50 किलोग्राम हुआ करता था। उस समय इसे घटाकर 45 किलोग्राम कर दिया गया था और अब इसे 40 किलोग्राम कर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में यूरिया का अनियंत्रित उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रहा है।
अनियंत्रित उपयोग और औद्योगिक दुरुपयोग पर लगाम
सरकार का यह कदम केवल खेतों में अनियंत्रित उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नहीं है, बल्कि यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी उठाया गया है। तमाम अभियानों के बावजूद किसान अभी भी जरूरत से कई गुना अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, प्लाईवुड, छपाई उद्योग, नकली दूध और अन्य रसायनों से जुड़े उद्योगों में भी यूरिया का प्रयोग हो रहा है। सरकार ने पैकेट का वजन कम करके और उसमें सल्फर मिलाकर इस दुरुपयोग को रोकने का प्रयास किया है।
सल्फर और नीम कोटिंग के फायदे
नए यूरिया में 17% सल्फर मिश्रित होने से मिट्टी में सल्फर की कमी दूर हो सकेगी, जिससे फसलें हरी-भरी होंगी। करीब एक दशक पहले यूरिया के गलत प्रयोग को रोकने के लिए इसे नीम कोटेड बनाया गया था। नीम कोटिंग से यूरिया धीरे-धीरे घुलता है, जिससे भूजल प्रदूषण कम होता है और वायु प्रदूषण का असर भी घटता है। इसके अलावा, नीम कोटेड यूरिया के उपयोग से भूमि में मौजूद अन्य पोषक तत्वों की उपयोग क्षमता बढ़ी है और खपत में भी 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आई है।
