ग्रेच्युटी नियम में बड़ा बदलाव: 1 साल में किसे मिलेगी और किसे करने होंगे 5 साल पूरे? जान लीजिए नया नियम
Gratuity Rules: सरकार ने शुक्रवार, 22 नवंबर 2025 से नए लेबर कोड लागू किए थे। नए नियमों में ग्रेच्युटी को लेकर भी कुछ प्रावधान थे। नए नियमों के अनुसार कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पेमेंट के लिए एलिजिबल होने के लिए लगातार सर्विस के सालों की संख्या मौजूदा पांच साल से घटाकर एक साल कर दी गई है, जिसका मकसद वर्कर्स के लिए वेलफेयर उपायों को मजबूत करना है। लेकिन यहां पर एक झोल है। झोल यह है कि यह नियम परमानेंट कर्मचारियों के लिए नहीं है।
नए नियम के तहत फिक्स्ड कर्मचारी एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी के पात्र होंगे। फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई वह व्यक्ति होता है जिसे एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम पर रखा जाता है, जिसमें एक पहले से तय आखिरी तारीख होती है या जो किसी खास काम या प्रोजेक्ट के पूरा होने पर खत्म हो जाता है।
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के तहत, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी पहले किसी जगह पर लगातार 5 साल की सर्विस पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी के लिए एलिजिबल होते थे। नए लेबर कोड लागू होने के साथ, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉई (FTE) के लिए इस टेन्योर की जरूरत में ढील दी गई है। ऐसे कर्मचारी अब सिर्फ एक साल की सर्विस पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी के लिए एलिजिबल होंगे। मिनिस्ट्री ने साफ किया कि इस बदलाव का मकसद फिक्स्ड-टर्म वर्कर को उनके परमानेंट कर्मचारियों के बराबर लाना है।
सर्विस पीरियड की जरूरत कम कर दी गई है, लेकिन सिर्फ फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए। नए सोशल सिक्योरिटी कोड के सेक्शन 53 में कहा गया है कि 5 साल की लगातार सर्विस की जरूरत तब जरूरी नहीं होगी जब नौकरी खत्म होने पर फिक्स्ड-टर्म नौकरी खत्म हो रही हो।
नए नियमों से परमानेंट कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं बदला है और उन्हें सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स मिलते रहेंगे, लेकिन जहां तक ग्रेच्युटी एलिजिबिलिटी का सवाल है, इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। परमानेंट (ऑन-रोल) कर्मचारियों के लिए कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे लगातार पांच साल की सर्विस पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी के लिए एलिजिबल होंगे।
बहुत से लोगों को ग्रेच्युटी का मतलब नहीं पता होता। आइए जानते हैं कि आखिर यह क्या है। ग्रेच्युटी एक एम्प्लॉयर की तरफ से एम्प्लॉई को लंबे समय तक लॉयल सर्विस के लिए तारीफ के तौर पर दिया जाने वाला एकमुश्त पेमेंट है। यह पेमेंट आम तौर पर कंपनी में कम से कम 5 साल पूरे करने के बाद रिटायरमेंट, इस्तीफे या डिसेबिलिटी पर दिया जाता है। यह भारत के पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 जैसे कानूनों के तहत आता है।
