BCE के छात्रों का ‘सखी’ इनोवेशन: माहवारी समस्याओं का टिकाऊ समाधान
भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (BCE) के मेधावी छात्रों ने एक ऐसा अनोखा और उपयोगी नवाचार किया है जो महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं का समाधान करेगा। ‘सखी’ नामक इस पर्सनलाइज्ड मेंस्ट्रुअल केयर किट को छात्रों ने समाज की एक गंभीर समस्या को ध्यान में रखकर तैयार किया है। वर्तमान में, बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसे सैनिटरी पैड का उपयोग करती हैं जिनमें हानिकारक रासायनिक तत्व होते हैं, जो गर्भाशय कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इन पैडों का अपघटन न होने के कारण पर्यावरण पर भी इनका बुरा असर पड़ता है।
इसी समस्या की जड़ तक पहुंचकर, बीसीई के युवा इंजीनियरों ने ‘सखी’ किट का निर्माण किया है। इस किट में महिलाओं की माहवारी के दौरान होने वाली सभी जरूरतों का ध्यान रखा गया है। किट में केले के रेशे या बांस फाइबर से बने बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड शामिल हैं, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं। ये पैड मात्र तीन महीनों में पूरी तरह से अपघटित हो जाते हैं, जिससे प्लास्टिक कचरे की समस्या कम होती है।
‘सखी’ किट में अन्य आवश्यक सामग्रियां भी हैं, जैसे कि हॉट वॉटर बैग, हैंड सैनिटाइजर, डिस्पोजल बैग और आपातकालीन स्थिति के लिए चॉकलेट। इसके अलावा, यह किट 24 घंटे सातों दिन मेडिकल सपोर्ट की सुविधा भी प्रदान करती है, जिससे महिलाएं किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता के लिए तत्काल सहायता प्राप्त कर सकेंगी।
कॉलेज के स्टार्टअप सेल ने इस नवाचार को सराहा है और इसे उद्योग विभाग को मंजूरी के लिए भेज दिया है। औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद, इस स्टार्टअप को वित्तीय सहायता प्राप्त होगी, जिससे ‘सखी’ किट का बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण संभव हो सकेगा।
‘सखी’ स्टार्टअप की संस्थापक हर्ष कुमार, सह-संस्थापक स्नेहलता कुमारी और प्रबंध निदेशक शिवानी कुमारी ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं है, बल्कि मासिक धर्म स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया मापदंड स्थापित करना है। बीसीई के छात्रों का यह प्रयास दर्शाता है कि किस प्रकार युवा प्रतिभाएं प्रयोगशालाओं से बाहर निकलकर समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकती हैं और महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
