Ayushman Bharat fraud: UP के अस्पतालों ने 592 मरीजों का दावा किया, जांच में मिले केवल 40
उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट और स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट की संयुक्त जांच में लखनऊ के कई निजी अस्पतालों की पोल खुल गई है। इन अस्पतालों ने योजना के तहत मरीजों को भर्ती दिखाकर लाखों रुपये के फर्जी क्लेम किए थे। जांच में पाया गया कि कई अस्पतालों ने बेड क्षमता से कहीं अधिक मरीजों को भर्ती दिखाया, जबकि मौके पर निरीक्षण के दौरान मरीजों की संख्या बेहद कम मिली।
जांच के दौरान शान्या स्कैन हॉस्पिटल ने 592 मरीजों को भर्ती दिखाते हुए क्लेम किया था, लेकिन जब टीम ने मौके पर निरीक्षण किया तो केवल 40 मरीज ही भर्ती पाए गए। अस्पताल प्रबंधन इस भारी अंतर का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके अलावा, अस्पताल ने मरीजों को पेट स्कैन और कीमोथेरेपी के लिए भर्ती दिखाया था, जबकि वास्तव में केवल पेट स्कैन ही किया गया था। अस्पताल के पास कुल 28 बेड थे, लेकिन क्लेम में मरीजों की संख्या इससे कई गुना अधिक थी।
अन्य अस्पतालों में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अद्भुत हॉस्पिटल के निरीक्षण में आईसीयू वार्ड में संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। अस्पताल में तीन ड्यूटी डॉक्टर होने चाहिए थे, लेकिन निरीक्षण के समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। ओम साई हॉस्पिटल ने 10 बेड के लिए पंजीकरण कराया था, लेकिन मौके पर केवल पांच बेड ही मिले। पुष्पांजली हॉस्पिटल में पोर्टल पर नौ मरीज दर्ज थे, जबकि मौके पर केवल एक ही आयुष्मान लाभार्थी मौजूद था।
शताब्दी हॉस्पिटल का संचालन भूमिगत बेसमेंट में किया जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है। यहां आयुष्मान योजना से संबंधित हेल्प डेस्क नहीं था और न ही प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध था। मेडी हेल्थ हॉस्पिटल में भी बायोमेडिकल वेस्ट का प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका था और फायर एनओसी जारी नहीं की गई थी।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इन सभी अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित अस्पतालों को विस्तृत नोटिस जारी किए हैं। प्राधिकरण की सीईओ अर्चना वर्मा ने मुख्य चिकित्साधिकारियों को भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि योजना से जुड़े अस्पतालों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मंडल स्तर पर विशेष टीमें गठित कर जांच अभियान चलाया जा रहा है। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ निलंबन और डि-इम्पैनलमेंट की कार्रवाई की जाएगी।
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