अरावली खनन विवाद: केंद्र ने आरोपों को नकारा, कहा- 90% से ज्यादा क्षेत्र सुरक्षित (Aravalli mining news)
केंद्र सरकार ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा बड़े पैमाने पर खनन के दरवाजे खोल देगी। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को स्पष्ट किया कि इस पारिस्थितिक रूप से नाजुक पर्वत श्रृंखला का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संरक्षित रहेगा और खनन के लिए कोई ढील नहीं दी गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि नई परिभाषा अरावली को नष्ट कर देगी।
मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि “गलत सूचना फैलाना बंद करें!” उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित यह ढांचा वास्तव में क्षेत्र के संरक्षण को मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि अरावली के कुल 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र ही खनन के लिए योग्य है। बाकी पूरा अरावली संरक्षित है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय के पैनल की सिफारिशों को मंजूरी दी थी, जिसमें अरावली पहाड़ियों को परिभाषित किया गया था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस परिभाषा की आलोचना करते हुए कहा था कि यह 90 प्रतिशत अरावली पहाड़ियों को ‘अरावली’ के दायरे से बाहर कर देगी, जिससे खनन को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निष्कर्ष निकालना गलत है कि 100 मीटर की सीमा से नीचे के सभी भू-आकृतियाँ स्वचालित रूप से खनन के लिए खुल जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि यह प्रतिबंध संपूर्ण पहाड़ी प्रणालियों पर लागू होता है, न कि केवल पहाड़ी चोटियों या ढलानों पर।
