Kanpur Lucknow Expressway पर AI का पहरा, दुर्घटना होते ही खुद भेजेगा अलर्ट
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे (NE-6) पर अब यात्रियों की सुरक्षा के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना होने की स्थिति में अब किसी को कॉल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि AI आधारित सिस्टम खुद ही कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेगा। यह ऑटोमेटिक एक्सीडेंट डिटेक्शन सिस्टम (AADS) दुर्घटना की पहचान कर तुरंत एंबुलेंस और पेट्रोलिंग व्हीकल को मौके पर भेजेगा, जिससे घायलों को समय पर इलाज मिल सके और जनहानि को रोका जा सके।
कैसे काम करता है AI सिस्टम
एक्सप्रेसवे पर लगे आधुनिक सीसीटीवी कैमरे और सेंसर 24 घंटे सड़क की निगरानी करेंगे। ये कैमरे मशीन लर्निंग और AI तकनीक से लैस हैं, जो सड़क पर होने वाली अनियमित गतिविधियों को पहचान सकते हैं। यह सिस्टम यह भेद कर सकता है कि कोई कार अचानक रुकी है या फिर दुर्घटनाग्रस्त हुई है। जैसे ही कोई असामान्य गतिविधि (जैसे कार पलटना, टक्कर होना या अचानक रुकना) होती है, यह तुरंत कंट्रोल रूम को सटीक लोकेशन के साथ अलर्ट भेज देता है। मशीन लर्निंग के कारण यह सिस्टम जितनी बार ऐसी घटनाओं को देखता है, उसकी सटीकता उतनी ही बढ़ती जाती है।
गोल्डन आवर में मिलेगी मदद
कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलते ही हाईवे एंबुलेंस और पेट्रोलिंग व्हीकल तत्काल मौके पर पहुंचेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य घायलों को “गोल्डन आवर” (दुर्घटना के बाद का महत्वपूर्ण समय) में नजदीकी ट्रॉमा सेंटर पहुंचाना है। पेट्रोलिंग व्हीकल और रेस्क्यू टीम रास्ता साफ कराने और मेंटेनेंस का काम भी करेगी। NHAI ने उन्नाव और लखनऊ सीमा पर एंट्री ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) कंट्रोल रूम बनाया है, जो इस पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित करेगा।
एक्सप्रेसवे की खासियत
यह 63 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे कानपुर और लखनऊ को जोड़ता है। यह प्रदेश का सबसे छोटा एक्सप्रेसवे है, जिसे 120 किमी प्रतिघंटा की औसत रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। एक्सप्रेसवे पर कोई कट या चौराहा नहीं है, बल्कि तीन इंटरचेंज और एक्सेस कंट्रोल्ड प्रवेश-निकास गेट हैं। सड़क को एकदम समतल बनाने के लिए जीपीएस आधारित मशीन गाइडिंग और लेजर ग्रेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
