आगरा: दयालबाग का अनोखा मॉडल, सोलर एनर्जी और जैविक खेती से नियंत्रित हुआ Agra AQI
आगरा शहर में प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इसी शहर में स्थित दयालबाग एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करता है जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया है। राधास्वामी मत से जुड़े दयालबाग शिक्षण संस्थान और इसकी कॉलोनियों में पर्यावरण संरक्षण के लिए कई अनूठे कदम उठाए गए हैं, जो देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। जहां शहर का AQI अक्सर मध्यम श्रेणी में रहता है, वहीं दयालबाग का AQI उससे काफी बेहतर पाया जाता है। यह दिखाता है कि सामूहिक प्रयासों से प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है और नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।
दयालबाग में पर्यावरण संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। यहां सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग होता है, जिसमें रूफटॉप सोलर प्लांट और एक विशेष एग्रीवोल्टेइक सोलर प्लांट शामिल है। इसके अलावा, जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कम होता है। सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है ईंधन आधारित वाहनों पर सख्त प्रतिबंध। दयालबाग की कॉलोनियों में लोग मुख्य रूप से साइकिल या बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम स्तर पर रहता है।
एग्रीवोल्टेइक मॉडल: ऊर्जा और कृषि का संगम
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) में स्थापित एग्रीवोल्टेइक सोलर प्लांट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नवाचारी कदम है। लगभग 200 किलोवाट क्षमता का यह प्लांट ऊंचे पोल पर लगे सोलर पैनल से बिजली पैदा करता है, जबकि उन्हीं पैनलों के नीचे खेती भी की जाती है। इस दोहरे उपयोग से भूमि का अधिकतम लाभ मिलता है – ऊपर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होता है और नीचे चना, बैंगन, टमाटर जैसी फसलें उगाई जाती हैं। सोलर पैनल फसलों को छाया भी प्रदान करते हैं, जिससे पानी की बचत होती है और उनकी वृद्धि बेहतर होती है। यह मॉडल न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करता है, बल्कि कृषि भूमि का सौर ऊर्जा के लिए दोहरा लाभ भी सुनिश्चित करता है।
स्वच्छ हवा और स्वावलंबी जीवनशैली
1915 में स्थापित दयालबाग सत्संगी कॉलोनी आज एक स्वावलंबी और हरी-भरी बस्ती है। लगभग 6.55 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस इलाके में सात से आठ हजार लोग रहते हैं। यहां की शांत आबोहवा और हरियाली इसे शहर के बाकी हिस्सों से अलग बनाती है। वाहनों पर प्रतिबंध के कारण यहां व्यस्त सड़कों का धूल-धुआं नहीं, बल्कि साइकिलों की घंटियां और इलेक्ट्रिक रिक्शों की आवाज गूंजती है। दयालबाग नियमित रूप से अपनी वायु गुणवत्ता की निगरानी करता है, और इसकी रिपोर्ट बताती है कि यहां का AQI ज्यादातर संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में ही रहता है। यह मॉडल सतत विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां ऊर्जा संरक्षण और कृषि को एक साथ जोड़कर एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण किया गया है। यह पूरे जिले और देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत है कि कैसे छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े पर्यावरणीय बदलाव लाए जा सकते हैं।
