आगरा कॉलेज के छात्रों ने बनाया स्मार्ट AI सिस्टम, आपदा अलर्ट में करेगा मदद
आगरा कॉलेज फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग (FET) के एक्सिस (AI एक्सपीरियंस एंड इनोवेशन स्पेस) रिसर्च समूह ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक AI-आधारित ‘कोस्टल हैज़र्ड इंटेलिजेंस सिस्टम’ का प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह सिस्टम चक्रवात और बाढ़ जैसी आपदाओं के समय इंटरनेट मीडिया, नागरिकों की सूचनाओं, सेंसर और गूगल मैप से मिलने वाले डेटा की पुष्टि कर प्रशासन को रियल-टाइम और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराएगा।
इस प्रोजेक्ट को बीटेक कंप्यूटर साइंस फाइनल के छात्रों ने तैयार किया है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुज पाराशर ने बताया कि आपदा के समय विभिन्न माध्यमों से आने वाली सही और गलत सूचनाओं की पहचान करना मुश्किल हो जाता है, इसी समस्या को हल करने के लिए यह सिस्टम विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) है, जो सोशल मीडिया, मौसम विभाग की सूचना, लोकल सेंसर, सैटेलाइट और गूगल मैप्स जैसे विभिन्न स्रोतों से डेटा सीधे AI मॉडल तक पहुंचाती है।
छात्रा तरू पाठक ने बताया कि सिस्टम में नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) तकनीक का उपयोग किया गया है, जो सोशल मीडिया पोस्ट को पढ़कर आपदा संबंधी सूचनाओं की पहचान करेगी। मल्टीमॉडल AI फोटो और वीडियो का विश्लेषण कर जलभराव, सड़कों की स्थिति और नुकसान का आकलन करेगा। ‘ट्रस्ट स्कोर’ तकनीक सोशल मीडिया से मिली जानकारी का सेंसर और सैटेलाइट डेटा से मिलान कर उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है, जिससे सही सूचना प्रसारित हो और राहत कार्य तेजी से किया जा सके। सिस्टम में एक रियल-टाइम जियो स्पेशल डैशबोर्ड भी है, जहां डिजिटल नक्शे पर प्रभावित क्षेत्रों और राहत कार्यों की प्राथमिकता दिखाई देगी।
डॉ. पाराशर ने बताया कि सिस्टम का प्रोटोटाइप तैयार है और टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। जल्द ही इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन को इसका प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। अनुमति मिलने पर, इसकी वेब एप्लीकेशन को स्थानीय स्तर पर लागू किया जाएगा। यह तकनीक नागरिकों की शिकायतों, सोशल मीडिया, मौसम विभाग के सेंसर और अन्य डिजिटल स्रोतों से रियल-टाइम डेटा एकत्र करेगी। NLP तकनीक सूचनाओं का विश्लेषण कर आपदा से जुड़ी जानकारी को अलग करेगी। यदि किसी पोस्ट में स्थान स्पष्ट नहीं होगा, तो AI संकेतों के आधार पर सटीक जियो लोकेशन प्रदान की जाएगी। विभिन्न स्रोतों से मिली सूचनाओं का मिलान कर उनकी सत्यता जांची जाएगी और डिजिटल डैशबोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे अधिकारी एक क्लिक में प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और राहत कार्यों की प्राथमिकता तय कर सकेंगे।
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