लखनऊ में 28 साल बाद Rajasthan Police ने दबोचा 25 हजार का इनामी जालसाज
लखनऊ के गोमतीनगर में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया जब स्मारक सुरक्षा वाहिनी के एक गार्ड को बच्चों के सामने ही कुछ लोगों ने स्कार्पियो में खींचकर उठा लिया। बाद में पता चला कि यह अपहरण नहीं, बल्कि राजस्थान पुलिस की एक कार्रवाई थी। राजस्थान की क्राइम ब्रांच ने जालसाजी के पुराने मामले में 25 हजार के इनामी आरोपी अखिलेश त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी गोमतीनगर के विश्वासखंड पांच में ग्वारी चौराहे के पास हुई, जहाँ अखिलेश अपने बच्चों के साथ मंदिर जा रहे थे।
अखिलेश त्रिपाठी पर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में वर्ष 1998 और 2000 में धोखाधड़ी, साजिश और धमकी के दो मुकदमे दर्ज थे। इन मामलों में वह पिछले 28 सालों से फरार चल रहा था और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। फरार होने के बाद अखिलेश लखनऊ आ गया था और आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाकर स्मारक सुरक्षा वाहिनी में गार्ड की नौकरी कर रहा था।
राजस्थान पुलिस की गोपनीय कार्रवाई
राजस्थान पुलिस को अखिलेश के लखनऊ में होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद वहां की क्राइम ब्रांच की टीम गोपनीय तरीके से लखनऊ पहुंची। रविवार को जब अखिलेश बच्चों के साथ मंदिर जा रहे थे, तभी काले रंग की स्कार्पियो में सवार टीम ने उन्हें रोका और गाड़ी में खींचकर अपने साथ ले गई। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर मोहल्ले के लोग इकट्ठा हो गए और सोशल मीडिया पर अपहरण की सूचना तेजी से फैल गई, जिससे स्थानीय पुलिस में भी हड़कंप मच गया।
गोमतीनगर इंस्पेक्टर ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि अखिलेश को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कुछ देर बाद राजस्थान पुलिस की टीम गोमतीनगर थाने पहुंची और स्थानीय पुलिस को पूरी जानकारी दी। इस गिरफ्तारी से यह संदेश गया है कि अपराधी चाहे कितने भी साल तक छिपकर रहे, कानून के हाथ उस तक पहुँच ही जाते हैं।
