जंतर-मंतर प्रदर्शन विवाद पर अभिजीत दिपके का पलटवार | national politics
दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शनों को लेकर राजधानी का व्यापारिक वर्ग और कॉकरोच जनता पार्टी आमने-सामने आ गए हैं। कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट के प्रमुख व्यापारी संगठनों ने उपराज्यपाल को संयुक्त पत्र सौंपकर जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की मांग की है। इसके अलावा खान मार्केट एसोसिएशन और दिल्ली किराना कमेटी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। व्यापारियों का तर्क है कि प्रदर्शनों के दौरान की जाने वाली बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन से उनका कारोबार प्रभावित होता है और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी खतरा पैदा होता है।
व्यापारियों के इन आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि कारोबार शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की वजह से नहीं, बल्कि सरकारी स्तर पर शहर में किए जाने वाले शटडाउन, इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और आवाजाही पर रोक लगाने के कारण प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी के दिखाए शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलती है और देश के विभिन्न शहरों में उन्होंने हमेशा अनुशासित प्रदर्शन किए हैं। जयपुर में खुद पर हुए हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तमाम उकसावे के बावजूद उन्होंने हिंसा का जवाब नहीं दिया क्योंकि वे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं।
दिपके ने सत्ता पक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज जो लोग सत्ता में बैठे हैं, उन्होंने भी विपक्ष में रहते हुए दशकों तक सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछना, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और जवाबदेही तय करना अराजकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मूल आधार है। जनता द्वारा चुनी गई सरकारों का यह दायित्व है कि वे नागरिकों की आवाज सुनें न कि उन्हें दबाएं। इस बढ़ते विवाद के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन और न्यायपालिका व्यापारियों की सुरक्षा चिंताओं और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच किस प्रकार संतुलन बनाते हैं।
