संदेसरा मामला: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से माल्या-नीरव की राहें हो सकती हैं आसान
नई दिल्ली: स्टर्लिंग ग्रुप के मालिक संदेसरा बंधुओं, नीतीन और चेतन संदेसरा, द्वारा 5100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि संदेसरा बंधु 5100 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान करते हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले रद्द कर दिए जाएंगे। यह फैसला उन आर्थिक अपराधियों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है, जो इसी तरह के आरोपों में घिरे हैं, जिनमें विजय माल्या और नीरव मोदी प्रमुख हैं।
जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले को भगोड़े आर्थिक अपराधियों के मामलों को निपटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। सीबीआई की प्राथमिकी में संदेसरा बंधुओं पर बैंकों को कुल 5100 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप था। सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर तक इस राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। हालांकि, बैंकों को अब तक 4700 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। इसमें 3507 करोड़ रुपये संदेसरा बंधुओं ने स्वयं चुकाए थे, जबकि 1192 करोड़ रुपये ईडी ने उनकी जब्त की गई संपत्तियों से वसूल कर बैंकों को लौटाए थे। इस तरह, कुल भुगतान 5100 करोड़ रुपये से बढ़कर 9800 करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि बैंकों के लिए लगभग दोगुनी राशि की वापसी के साथ मामले को समाप्त करने का यह निर्णय उचित है। इस बड़ी वसूली में ईडी की भूमिका अहम रही है, जिसने संदेसरा बंधुओं की देश-विदेश में फैली 14550 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले को सीधे तौर पर अन्य मामलों में नजीर नहीं बनाया जा सकता है। इसके बावजूद, वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक अपराधियों के मामलों को सुलझाने की यह नई दिशा आगे भी जारी रह सकती है। लंदन से प्रत्यर्पण का सामना कर रहे कारोबारी विजय माल्या, जिन पर 6,203 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है, भी इसी तरह के समाधान की तलाश में हैं। माल्या की कुल देनदारी ब्याज सहित 7403 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि ईडी ने उनकी 14,031 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। माल्या अब संदेसरा मामले के फैसले का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट से अपने मामले के निपटारे की गुहार लगा सकते हैं।
नीरव मोदी का मामला, जो ब्रिटेन से प्रत्यर्पण का सामना कर रहा है, थोड़ा अधिक जटिल है। 14000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी नीरव मोदी के मामले में अब तक केवल 1500 करोड़ रुपये की ही वसूली हुई है। ऐसे में, नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी को संदेसरा बंधुओं की तरह राहत पाने के लिए बैंकों को एक बड़ी रकम चुकानी होगी।
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