बिहार के स्कूलों में डिजिटल उपस्थिति: टैबलेट वितरण शुरू, शिक्षा व्यवस्था में क्रांति की ओर
बिहार के सरकारी विद्यालयों में अब उपस्थिति दर्ज कराने का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा। शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर के विद्यालयों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू करने की शुरुआत कर दी है। इसके तहत, छात्रों और शिक्षकों की हाजिरी अब ऑनलाइन दर्ज की जाएगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
इस नई प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए, विद्यालयों में टैबलेट का वितरण शुरू कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रखंड स्तर पर कई विद्यालयों में टैबलेट पहुंचाए जा चुके हैं और शेष विद्यालयों में यह वितरण नवंबर के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। इस डिजिटल पहल से शिक्षकों में भी उत्साह देखा जा रहा है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक सभी के लिए टैबलेट की आपूर्ति की जा रही है। इन टैबलेट्स में ई-शिक्षाकोष (e-ShikshaKosh) जैसे विभाग के महत्वपूर्ण ऐप पहले से ही इंस्टॉल होंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन उपकरणों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जा सके, जिससे डेटा की सुरक्षा बनी रहे।
प्रधानाध्यापकों और तकनीक में रुचि रखने वाले शिक्षकों को टैबलेट के संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें उपस्थिति दर्ज करने, रिपोर्ट तैयार करने और विभिन्न ऐप्स का सुचारू रूप से संचालन करने में सक्षम बनाना है। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि नई तकनीक का उपयोग प्रभावी ढंग से हो सके।
शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को टैबलेट की आपूर्ति और वितरण का रिकॉर्ड हर स्तर पर सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक विद्यालय को आवंटित टैबलेट के आईएमईआई (IMEI) नंबर को विद्यालय के नाम के साथ दर्ज किया जा रहा है। यह कदम किसी भी संभावित गड़बड़ी या अनधिकृत बदलाव को रोकने के लिए उठाया गया है। बीआरसी (BRC) कार्यालयों में भी इस पूरे वितरण प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था लागू होने से कई महत्वपूर्ण सुधारों की उम्मीद है। छात्रों की उपस्थिति की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी, जिससे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की दर पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की उपस्थिति में भी पूर्ण पारदर्शिता आएगी, जिससे शैक्षणिक वातावरण और बेहतर होगा। यह डिजिटल पहल बिहार की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
