मत्स्य मंत्री के जाते ही नदी में उतराने लगीं मछलियां, जांच की मांग
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य विकास मंत्री संजय निषाद द्वारा गोमती नदी में रिवर रैंचिंग (मछलियों के बच्चों को नदी में छोड़ना) का कार्यक्रम विवादों में घिर गया है। सोमवार को जब मंत्री न्यू लक्ष्मण पार्क स्थित गोमती रिवर फ्रंट पर मछलियों के बीज नदी में छोड़ रहे थे, उसी दौरान कई मरी हुई मछलियां पानी की सतह पर तैरती पाई गईं। इस घटना ने कार्यक्रम की प्रभावशीलता और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने इस घटना को सामान्य बताते हुए कहा कि रिवर रैंचिंग प्रक्रिया में मछलियों की मृत्यु दर स्वाभाविक रूप से कुछ प्रतिशत होती है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में यह दर 30 प्रतिशत तक होती थी, जिसे उनके प्रयासों से घटाकर 10 प्रतिशत तक सीमित किया गया है, और अब यह पांच से 10 प्रतिशत के बीच है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले निजी हैचरी से मछलियां ली जाती थीं, लेकिन अब मत्स्य विकास निगम की हैचरी को जोड़ा गया है, जिससे लागत कम हुई है। उन्होंने नदी में प्रदूषण के मुद्दे पर भी कहा कि इस पर काम किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आयोजित किया गया था। इस दौरान मत्स्य विकास मंत्री ने उप्र मत्स्य विकास निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए दो लाख भारतीय मेजर कार्प मत्स्य बीज (रोहू, कतला और नैन) नदी में छोड़े। मंत्री अधिकारियों के साथ नाव पर सवार होकर नदी के बीच में पहुंचे और मछलियों को पानी में संचित किया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि नदी पारिस्थितिकीय प्रणाली के संरक्षण के लिए रिवर रैंचिंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य नदियों में मत्स्य संसाधनों का पुनर्जीवन, पारंपरिक मछली पकड़ने के तरीकों को बढ़ावा देना, मछुआ समुदाय की आजीविका को मजबूत बनाना और जलीय जैव विविधता में वृद्धि करना है। उन्होंने प्रदेश भर में रिवर रैंचिंग कार्यक्रमों को निरंतर संचालित करने का निर्देश दिया, जिससे जलीय जैव विविधता में वृद्धि और नदियों के पारिस्थितिकीय तंत्र को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए एयरेशन सिस्टम योजना और मछुआ दुर्घटना बीमा के छह लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव मत्स्य विकास मुकेश मेश्राम और निदेशक एनएस रहमानी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। हालांकि, मरी हुई मछलियों के मिलने से यह कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया है और इस पर आगे जांच की मांग उठ सकती है।
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