मुरादाबाद मंडल में बाल अपराध का बढ़ता ग्राफ: सजा तेज, पर अपराध स्थिर
मुरादाबाद मंडल में बच्चियों के खिलाफ अपराधों के प्रति सख्त रुख अपनाने और सजाओं में तेजी लाने के प्रयासों के बावजूद, अपराधों का ग्राफ चिंताजनक रूप से स्थिर बना हुआ है। शासन और पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित न्याय दिलाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में अपराधों में कमी नहीं दिख रही है।
आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 से 2025 के बीच, मुरादाबाद मंडल के पांचों जिलों – मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, रामपुर और बिजनौर में बालिकाओं के साथ दुष्कर्म और अन्य गंभीर अपराधों की घटनाओं में मामूली उतार-चढ़ाव तो रहा है, लेकिन कुल मिलाकर अपराध दर लगभग समान बनी हुई है। उदाहरण के तौर पर, 2021 में बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के 453 मामले सामने आए थे, जो 2022 में बढ़कर 503 हो गए। 2023 में यह संख्या 522 तक पहुंच गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 485 रहा। वर्ष 2025 में भी अक्टूबर माह तक 477 मामले दर्ज हो चुके हैं, और साल के अंत तक यह संख्या 500 के पार जाने की आशंका है।
वहीं, दूसरी ओर अदालतों द्वारा सजा सुनाने की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मुकदमों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। 2022 में जहां 463 आरोपितों को सजा सुनाई गई थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 694 हो गया। 2024 में 626 आरोपितों को दोषी ठहराया गया। इस साल अक्टूबर तक 171 आरोपितों को सजा मिल चुकी है, और पुलिस द्वारा दाखिल 398 आरोप पत्रों को देखते हुए यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
संभल में एक मामले में तो चार्जशीट दाखिल होने के महज दस दिन के भीतर आरोपित को दोषी करार देकर सजा सुना दी गई। इसी तरह, रामपुर में भी एक बालिका से दुष्कर्म के मामले में 45 दिनों के भीतर ही एक युवक को 20 साल की सजा सुनाई गई। इन त्वरित न्याय प्रक्रियाओं के बावजूद, अपराधों पर अंकुश लगाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।
जनपद बिजनौर में भी बालिकाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि देखी गई है। 2021 में 94 मामले थे, जो 2022 में 118, 2023 में 150 और 2024 में 151 हो गए। इस साल अक्टूबर तक 127 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो पिछले साल के आंकड़ों को पार कर सकते हैं।
बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, एंटी रोमियो टीम और मिशन शक्ति जैसे प्रयासों के बावजूद, मंडल में अपराधों की निरंतरता चिंताजनक है। यह स्थिति कानून व्यवस्था और समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर और अधिक प्रभावी उपायों की आवश्यकता है।
