दिल्ली कार विस्फोट मामला: घटनास्थल से 9mm कारतूस बरामद, पिस्तौल की तलाश में जुटी पुलिस
दिल्ली में लाल किला के पास हुए भयावह कार विस्फोट मामले की जांच में एक नया मोड़ आया है। जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को घटनास्थल से तीन 9mm कैलिबर के कारतूस बरामद हुए हैं, जिनमें दो जिंदा और एक खाली कारतूस शामिल है। हालांकि, इन कारतूसों को चलाने वाली पिस्तौल अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगी है, जिससे जांच एजेंसियों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन कारतूसों की बरामदगी के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के हथियारों की जांच भी की गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं ये कारतूस ड्यूटी पर तैनात स्टाफ के तो नहीं थे। जांच में पाया गया कि किसी भी पुलिसकर्मी का कोई कारतूस गायब नहीं था, जिससे यह संभावना खारिज हो गई। हैरानी की बात यह है कि बरामद हुए 9mm कारतूस आम नागरिकों के लिए प्रतिबंधित हैं। इनका उपयोग आमतौर पर सुरक्षा बलों या विशेष अनुमति प्राप्त व्यक्तियों द्वारा ही किया जाता है। घटनास्थल से कोई पिस्तौल या उसका कोई हिस्सा नहीं मिलने से पुलिस अब इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिरकार ये प्रतिबंधित कारतूस वहां कैसे पहुंचे।
यह मामला तब सामने आया जब लाल किले के पास एक कार में धमाका हुआ था। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में लोग घायलों को रेहड़ी और ई-रिक्शा के जरिए अस्पताल ले जाते हुए दिखाई दिए थे। कुछ गाड़ियों में आग लगी हुई भी देखी गई थी। जांच में पता चला कि इस धमाके में जैश के आतंकी उमर की i-20 कार का इस्तेमाल किया गया था, जिसे दिल्ली और आसपास के 43 सीसीटीवी कैमरों में देखा गया था।
इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी सक्रिय है। NIA ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एक छात्र को बंगाल से गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि धमाके के लिए लगभग 20 लाख रुपये जुटाए गए थे, लेकिन इन पैसों को लेकर आतंकियों के बीच विवाद हो गया था। गृह मंत्री ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए हैं और एक-एक दोषी को सजा दिलाने का संकल्प दोहराया है। पुलिस और अन्य एजेंसियां इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए गहनता से जांच कर रही हैं।
