दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए 11 सूत्रीय कार्ययोजना लागू, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी जानकारी | national news
दिल्ली-एनसीआर में विकराल रूप ले चुकी वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से सरकार ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसके तहत मैदानी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल से आम जनता को जहरीली हवा से राहत मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल बैठकों तक सीमित रहने से नहीं मिलेगा, बल्कि इसके लिए विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और सख्त जमीननी कार्रवाई की आवश्यकता है। सरकार ने प्रदूषण के तमाम स्रोतों का बारीकी से अध्ययन कर एक 11 सूत्रीय कार्ययोजना का खाका तैयार किया है।
प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर कड़ा पहरा
योजना के तहत वाहनों से निकलने वाले धुएं, उद्योगों के उत्सर्जन, सड़कों की धूल, निर्माण स्थलों से उड़ने वाले कण और ठोस कचरे के प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली में चिन्हित किए गए 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष नजर रखी जा रही है, जहाँ अधिकारियों को कड़ी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम के सख्ती से पालन के साथ सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सके।
औद्योगिक और धूल नियंत्रण पर विशेष फोकस
औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए करीब 350 से 400 इकाइयों को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीधे नजर रख सके। नियमों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों पर गाज गिरनी तय है। इसके अलावा, सड़कों की धूल रोकने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। आगामी दिनों में इन उपायों के जमीन पर उतरने से हवा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
