ताजमहल स्थित मस्जिद में कब और कैसे अदा की जाती है नमाज, जानें क्या हैं नियम | agra news
आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल परिसर में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद में इबादत करने को लेकर स्थानीय प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के खास नियम लागू होते हैं। रमजान और जुमे के पवित्र दिनों में यहां मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में नमाज अदा करने पहुंचते हैं। पर्यटकों और आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि इस स्मारक में कब-कब नमाज पढ़ने की अनुमति मिलती है।
निर्धारित समय-सारणी के अनुसार, ताजमहल की मस्जिद में पांचों वक्त की नमाज का समय तय है। सुबह तड़के फजर की नमाज के बाद, दोपहर एक बजे जुहर, दोपहर चार बजे के आसपास असर, शाम साढ़े छह बजे के करीब मगिब और रात आठ बजे इशा की नमाज अदा की जाती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के साथ इन तय समय में पांच से दस मिनट का बदलाव होता रहता है।
सप्ताह के आखिरी कार्यदिवस यानी शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। इस दिन आम पर्यटकों के लिए ताजमहल का मुख्य परिसर बंद रहता है, ताकि नमाजी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी इबादत पूरी कर सकें। नियमों के तहत केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश मिलता है जो नमाज में शामिल होने आते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक परंपरा दोनों का संतुलन बना रहता है। इस व्यवस्था से पर्यटकों और स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच किसी प्रकार का व्यवधान नहीं होता है।
