आगरा सामूहिक हत्याकांड मामले में 12 साल बाद गंभीर सिंह बरी, सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत | agra news
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के अछनेरा क्षेत्र स्थित तुरकिया गांव में एक मई 2012 की रात को एक ही परिवार के छह सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात में परिवार के मुखिया सत्यभान, उनकी पत्नी पुष्पा और चार मासूम बच्चों की तेजधार हथियारों से गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस सामूहिक हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
घटना के बाद पुलिस ने जमीन विवाद के पारिवारिक आरोपों और दबाव के चलते मृतका के भाई के बयान को आधार बनाते हुए सत्यभान के छोटे भाई गंभीर सिंह को मुख्य आरोपी बना दिया। स्थानीय अदालत और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गंभीर सिंह को दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन मामला जब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंचा, तो न्याय की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायमूर्तियों की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए गंभीर सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में पुलिसिया तफ्तीश की गंभीर कमियों को उजागर किया और स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। हत्या के पीछे के मकसद और बरामद हथियारों की प्रामाणिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए।
लंबी कानूनी लड़ाई और बारह साल की कैद के बाद जब गंभीर सिंह आगरा सेंट्रल जेल से बाहर आए, तो उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में न्याय मिलने में हुई लंबी देरी और शुरुआती जांच की खामियों ने एक बार फिर आपराधिक न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली पर विचार करने को मजबूर कर दिया है।
