शहीद कैप्टन शुभम गुप्ता की वर्दी से लिपटकर फफक पड़ी मां, घर पहुंचा यादों का संदूक | agra news
जम्मू-कश्मीर के राजौरी में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले आगरा के कैप्टन शुभम गुप्ता की आखिरी यादें जब उनके घर पहुंचीं, तो कोहराम मच गया। घटना के 12 दिन बाद सैन्य अधिकारियों ने शहीद अधिकारी का निजी सामान एक संदूक में रखकर उनके परिजनों को सौंपा। इस संदूक में कैप्टन की वर्दी, कपड़े, बैज, टोपी और अन्य इस्तेमाल की चीजें सुरक्षित थीं।
जैसे ही शहीद की मां ने अपने बेटे की वर्दी और सामान को देखा, वह खुद को रोक नहीं पाईं और फफक कर रो पड़ीं। मां कभी बेटे की वर्दी को सीने से लगाती तो कभी उसके बैज को चूमती नजर आईं। उनकी बस यही एक जिद थी कि उन्हें उनका बेटा वापस चाहिए। इस दृश्य ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया और वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। वहीं, दूसरी ओर शहीद के पिता बसंत गुप्ता कोने में खड़े होकर अपने आंसुओं को छिपाने और खुद को संभालने की कोशिश करते दिखाई दिए।
छ्ब्बीस साल के कैप्टन शुभम गुप्ता का चयन वर्ष 2015 में भारतीय सेना में हुआ था और 2018 में उन्हें कमीशन मिला था। वह पैराशूट रेजिमेंट की नौवीं बटालियन में तैनात थे। बीते 22 नवंबर को राजौरी के धर्मसाल के बाजीमाल इलाके में आतंकवादियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए और देश के लिए शहीद हो गए। इस एनकाउंटर में सेना के अन्य जवान भी शहीद हुए थे, जबकि सुरक्षाबलों ने दो कुख्यात आतंकवादियों को भी ढेर कर दिया था।
शहीद के पिता ने नम आंखों से याद करते हुए बताया कि घर में बेटे की शादी की तैयारियां चल रही थीं। घटना से दो दिन पहले ही उनकी शुभम से बात हुई थी, जिसमें उसने जल्द घर लौटने का वादा किया था। किसी को इस बात का अंदेशा नहीं था कि वह आखिरी बातचीत साबित होगी। एक युवा अधिकारी की शहादत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और हर कोई इस जांबाज की शहादत को नमन कर रहा है।
