आगरा में आवारा कुत्ते के काटने से 8 साल की बच्ची की मौत, वैक्सीन की बजाय करती रही घरेलू इलाज | agra news
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक बेहद दर्दनाक और आंखें खोल देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ समय पर सही इलाज न मिलने के कारण एक आठ साल की मासूम बच्ची की जान चली गई। बाह ब्लॉक के चौसंगी गांव की रहने वाली इस बच्ची को कुछ दिन पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। डर की वजह से उसने यह बात तुरंत अपने परिवार को नहीं बताई, और जब मां को पता चला तो उन्होंने अस्पताल ले जाने के बजाय घरेलू इलाज करना शुरू कर दिया।
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, संक्रमण बच्ची के शरीर में बढ़ता गया। जब उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई, तब परिजन उसे स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने स्थिति की नजाकत को देखते हुए उसे तुरंत एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया, लेकिन अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना कितना घातक साबित हो सकता है।
चिकित्सकों के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद लापरवाही बरतना जानलेवा हो सकता है। एनिमल बाइट के मामलों में पीड़ित को 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज वैक्सीन की पहली खुराक मिल जानी चाहिए। इसके बाद तय शेड्यूल के तहत आगे के डोज दिए जाते हैं। हाइड्रोफोबिया यानी पानी से डर लगना, गर्दन में तेज दर्द और उल्टियां आना रेबीज के शुरुआती लक्षण हैं। इस तरह की घटनाओं से सबक लेते हुए अभिभावकों को जागरूक होने की सख्त जरूरत है ताकि किसी अन्य मासूम की जान इस तरह न जाए।
