उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश तक यमुना का कहर, किन वजहों से उफान पर है नदी | national news
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने मैदानी राज्यों में भारी तबाही मचा रखी है। उत्तरकाशी के बंदरपूंछ पर्वत से निकलने वाली यमुना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस भीषण जलसंकट ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है।
पहाड़ों से मैदानी इलाकों तक तबाही
यमुना नदी उत्तराखंड से निकलकर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से होते हुए प्रयागराज में गंगा में मिलती है। उत्तराखंड में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश होने के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। हरियाणा के करीब 10 जिलों में यमुना का पानी घुसने से लगभग तीन लाख एकड़ फसल बर्बाद हो गई और कई गांवों का संपर्क कट गया।
राजधानी दिल्ली और यूपी के जिलों में संकट
हरियाणा से पानी छोड़े जाने के बाद दिल्ली में यमुना ने पिछले 45 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदी का पानी लाल किले और कश्मीरी गेट जैसे इलाकों तक पहुंच गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, शामली, अलीगढ़, मथुरा, आगरा और इटावा में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए। मथुरा और आगरा में तो यमुना का पानी ऐतिहासिक स्मारकों और मंदिरों के करीब तक पहुंच गया, जिससे स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहना पड़ा।
जल स्तर को नियंत्रित करने वाले बैराज
यमुना के उग्र रूप को नियंत्रित करने के लिए रास्ते में कई प्रमुख बैराज बनाए गए हैं, जिनमें डाकपत्थर, हथिनीकुंड, वजीराबाद, आईटीओ, ओखला और गोकुल बैराज शामिल हैं। हालांकि, क्षमता से अत्यधिक पानी आने पर जब इन बैराजों के गेट खोलने पड़ते हैं, तो मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा स्वतः उत्पन्न हो जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्यों के कारण ऐसी आपदाओं की बारंबारता बढ़ रही है, जिससे भविष्य के लिए पुख्ता जल प्रबंधन रणनीतियां अपनाने की आवश्यकता है।
