करोड़पति बेटों के बावजूद वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर 87 साल की मां | agra news
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से परिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाला एक संवेदनशील मामला सामने आया है। कभी संपन्नता और वैभव की जिंदगी जीने वाली 87 वर्षीय विद्या देवी आज अपनी ही संतानों की बेरुखी के कारण वृद्धाश्रम का जीवन बिता रही हैं। यह स्थिति तब है जब उनके चारों बेटे करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और समाज में प्रतिष्ठित जीवन जी रहे हैं।
विद्या देवी के पति गोपीचंद अग्रवाल अपने समय के जाने-माने नेत्र अस्पताल के संस्थापक थे और उनकी गिनती शहर के शीर्ष उद्योगपतियों में होती थी। करीब तेरह वर्ष पूर्व पति के निधन के बाद से ही घर के हालात बदलने लगे। बेटों ने पैतृक संपत्ति का तो आपसी बंटवारा कर लिया, लेकिन वृद्धा मां की सुधि तक नहीं ली। संपत्ति बंटवारे के बाद शुरू हुआ उपेक्षा का दौर धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना में बदल गया।
शुरुआती दिनों में विद्या देवी बारी-बारी से अपने बेटों के यहां रहीं, लेकिन बहुओं और बेटों के तानों ने उनका जीना मुहाल कर दिया। आरोप है कि मामूली बातों पर उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा और एक दिन धक्के देकर आलीशान कोठी से बाहर निकाल दिया गया। बुजुर्ग महिला कई महीनों तक अपमान का घूंट पीकर इधर-उधर भटकती रहीं। इस मानवीय त्रासदी का समाज पर गहरा असर पड़ रहा है, जहां नैतिक मूल्यों के पतन के कारण बुजुर्ग माता-पिता वृद्धाश्रम की शरण लेने को विवश हैं।
मामला संज्ञान में आने पर रिश्तेदार और स्थानीय महिला संगठन की प्रमुख शशि गोयल ने बेटों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने तो 19 दिसंबर को वृद्धा को रामलाल वृद्धा आश्रम में सुरक्षित पहुंचाया गया। वर्तमान में आश्रम प्रशासन उनकी देखभाल कर रहा है, लेकिन यह घटना आधुनिक समाज में रिश्तों की गिरती साख और वृद्धावस्था की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
