देश की फोरेंसिक लैब में रिश्वत लेकर रिपोर्ट बदलने का बड़ा खुलासा | crime news
देशभर में अपराध और साजिश के मामलों की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस फोरेंसिक जांच पर सबसे ज्यादा भरोसा करती है। लेकिन एक बड़ी मीडिया इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि किस तरह कुछ भ्रष्ट फोरेंसिक एक्सपर्ट पैसों के लिए गंभीर मामलों की रिपोर्ट तक बदल देते हैं। इस खुलासे के बाद न्याय व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली वैज्ञानिक जांच की पारदर्शिता कटघरे में आ गई है।
वाराणसी और लखनऊ में अधिकारियों की संलिप्तता
वाराणसी में एफएसएल के डिप्टी डायरेक्टर सुरेश चंद्रा ने एक हत्या के मामले में जहर की बात रिकॉर्ड से हटाने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की। उन्होंने आरोपी को क्लीन चिट देने के लिए एक विशेष टीम बनाने और अदालत में भी रिपोर्ट के पुख्ता होने का दावा किया। इसके अलावा, लखनऊ मुख्यालय में बलात्कार के मामले में डीएनए रिपोर्ट से छेड़छाड़ करने और इसे जल्द निपटाने की बात भी सामने आई।
आगरा और गुरुग्राम में भी खुला खेल
उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एफएसएल में जीव विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक संजीव द्विवेदी ने दहेज हत्या के एक मामले में विसरा रिपोर्ट से घातक पदार्थ का नाम हटाने के एवज में सवा दो लाख रुपये मांगे। वहीं, हरियाणा के गुरुग्राम में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी मधुप सिंह ने बीमा क्लेम के चक्कर में शराब पीकर गाड़ी चलाने के एक मामले में पॉजिटिव रिपोर्ट को नेगेटिव करने के लिए दो लाख रुपये की मांग की।
इस तरह के मामलों के सामने आने से आम जनता का जांच एजेंसियों और न्याय प्रणाली पर से भरोसा डगमगा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फोरेंसिक लैब जैसी अतिसंवेदनशील जगहों पर इस तरह की धांधली रुकती नहीं है, तो असली अपराधियों को सजा दिलाना और बेकसूरों को बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
