आगरा शिखर सम्मेलन 2001 में परवेज मुशर्रफ का दौरा क्यों विफल रहा था | international relations history
वर्ष 2001 का आगरा शिखर सम्मेलन भारत और पाकिस्तान के कूटनीतिक इतिहास के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बुलावे पर पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ भारत आए थे। इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच जमे बर्फ को पिघलाना और द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाना था, लेकिन यह दौरा उम्मीदों के विपरीत बेहद तनावपूर्ण साबित हुआ।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों के रुख में बुनियादी अंतर साफ नजर आया। भारत का स्पष्ट रुख था कि सीमा पार से हो रहे आतंकवाद को रोके बिना किसी भी सार्थक संवाद की शुरुआत नहीं हो सकती। इसके विपरीत, पाकिस्तानी पक्ष कश्मीर को एकमात्र प्राथमिक मुद्दा बनाने पर अड़ा रहा और आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी तक करार दिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब मुशर्रफ ने भारतीय पत्रकारों के साथ एक नाश्ता बैठक के दौरान आक्रामक तेवर दिखाते हुए अपने एजेंडे को खुलेआम रखा, जिससे भारतीय नेतृत्व असहज हो गया।
कूटनीतिक स्तर पर उत्पन्न इस भारी तनाव और बातचीत के विफल हो जाने के कारण अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह जाने का उनका पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। बिना किसी संयुक्त घोषणापत्र के इस दौरे के अचानक समाप्त होने से दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध लंबे समय के लिए प्रभावित हुए, जिसका असर क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ा।
